रांची: नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासी और मूलवासी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर आदिवासियों की बची-खुची जमीन भी छीनने की तैयारी कर रही है.


चंपाई सोरेन ने सवाल उठाया कि रांची शहर की नींव जिन आदिवासी और मूलवासी परिवारों की जमीन पर रखी गई, उन्हें आज तक उनका हक और सम्मान क्यों नहीं मिला. उन्होंने एचईसी, लॉ यूनिवर्सिटी, हाईकोर्ट, विधानसभा और अन्य सरकारी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जमीन तो ली गई, लेकिन विस्थापितों का समुचित पुनर्वास आज भी अधूरा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 1957-58 के अधूरे भूमि अधिग्रहण को आधार बनाकर नगड़ी की जमीन पर दावा कर रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार यदि मुआवजा नहीं दिया गया हो और सरकार का वास्तविक कब्जा नहीं हो तो ऐसी प्रक्रिया स्वतः निरस्त मानी जाती है. उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर आज भी खेती हो रही है, उन्हें अधिग्रहित बताना किसानों के साथ अन्याय है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की स्वास्थ्य नीति पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि राज्य के अस्पतालों में दवाइयों, डॉक्टरों, जांच सुविधाओं और एम्बुलेंस की भारी कमी है. मरीजों को आज भी खाट और कंधे पर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. ऐसे में सवाल यह है कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारना चाहती है या सिर्फ नई इमारतें खड़ी करना चाहती है. जमशेदपुर में हाल ही में बने नए एमजीम अस्पताल और सरायकेला में नव निर्मित ट्रामा सेंटर का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा और कहा एमजीम अस्पताल का नया भवन तो बन गया मगर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ ? इसी तरह आज उनके विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर बनकर तैयार है आजतक उद्घाटन क्यों नहीं किया गया ?
चंपाई सोरेन ने कहा कि जब एचईसी की सैकड़ों एकड़ जमीन उपलब्ध है तो फिर आदिवासियों की कृषि भूमि पर ही रिम्स-2 बनाने की जिद क्यों की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का असली उद्देश्य विकास नहीं बल्कि आदिवासी और मूलवासी समुदायों को उनकी जमीन से बेदखल करना है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि नगड़ी क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र है और यहां सीएनटी एक्ट समेत कई संरक्षण कानून लागू हैं. इन अधिकारों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने राज्यभर के आदिवासी-मूलवासी समाज से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि नगड़ी में महादरबार लगाया जाएगा और लाखों लोग मिलकर अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ेंगे.
चंपाई सोरेन के इस बयान के बाद रिम्स-2 परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है. अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई है.



