सरायकेला: जिले में इन दिनों सत्ता के गलियारों में एक नई कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है. फर्क बस इतना है कि इस बार कहानी विकास की नहीं, बल्कि आरोपों की है. सरायकेला नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा पर लगे गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक सिस्टम को आईना दिखा दिया है.

चाईबासा महिला थाना में दर्ज शिकायत के बाद मामला अब “फाइल” से निकलकर “फोकस” में आ चुका है. शिकायत करने वाली महिला का आरोप है कि साहब ने पहले भरोसे का पुल बनाया, फिर वादों का महल खड़ा किया, और आखिर में रिश्ते को “ऑफिशियल” नहीं, “पर्सनल” बना दिया. तीन महीने तक साथ रखने, शादी का भरोसा देने और फिर मारपीट तक की बात सामने आई है. कहानी में मोड़ तब आया, जब मामला थाने तक पहुंच गया.
अब हालात कुछ ऐसे हैं कि फाइलों में आदेश देने वाले अधिकारी खुद कानूनी धाराओं के पन्नों में घिरते नजर आ रहे हैं. आरोप दुष्कर्म जैसे गंभीर हैं, और चर्चा यह कि गिरफ्तारी “कभी भी” हो सकती है.
दरअसल सरायकेला नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा पर लगे गंभीर आरोप अब महज चर्चा नहीं, बल्कि कानूनी दायरे में पूरी तरह दाखिल हो चुके हैं.
कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़
जिस समय आरोपों की गूंज तेज हो रही थी, उसी दौरान साहब ने इसी महीने सरायकेला टाउन हॉल में अपनी कथित मंगेतर के साथ चुनिंदा मेहमानों की मौजूदगी में शादी रचा ली. और उसके बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया. चाईबासा महिला थाने की पुलिस समीर बाबू को ढूंढ़ने पहुंची भी मगर साहब मिले नहीं और पुलिस बैरंग लौट गई. चाईबासा महिला थाना में दर्ज मामले को लेकर थाना प्रभारी शिला मिंज ने स्पष्ट किया है कि महिला ने पहले कोर्ट में मामला दर्ज कराया था. कोर्ट के आदेश के बाद जांच हुई और जांच में महिला द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए. थाना प्रभारी के अनुसार, महिला के आरोपों की पुष्टि आरोपी अधिकारी के गांव के ग्रामीण मानकी- मुंडा द्वारा भी की गई है. अब पुलिस ने कोर्ट में वारंट निर्गत करने की अर्जी दे दी है जैसे ही वारंट मिलेगा, गिरफ्तारी की जाएगी. साथ ही पूरे मामले से सरायकेला- खरसावां उपायुक्त को भी अवगत करा दिया गया है.
सवाल जो हवा में तैर रहे हैं
क्या ये शादी “सेटेलमेंट” थी या “सिचुएशन मैनेजमेंट” ? और सबसे बड़ा सवाल- कानून पहले पहुंचेगा या साहब सामने आएंगे ? पुलिस कह रही है “वारंट का इंतजार है.” जनता कह रही है- “जवाब का इंतजार है.” यह मामला एक बार फिर याद दिला रहा है कि आरोपों की शुरुआत भले किसी शिकायत से होती हो, लेकिन उसका अंजाम अदालत ही तय करती है. तब तक सरायकेला में चर्चा जारी है- “कहानी में ट्विस्ट बहुत है… अब क्लाइमैक्स का इंतजार है.” उधर कार्यपालक अधिकारी ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद और मनगढंत बताया है.
Report by Pramod Singh

