सरायकेला: नगर क्षेत्र में शनिवार को सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, जब नगर पंचायत के सफाई कर्मियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया. वर्षों से दबा आक्रोश आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा. कर्मियों ने दो टूक कहा- जब तक हक नहीं, तब तक काम नहीं.

सफाई कर्मियों का आरोप है कि वर्ष 2020 से उनके वेतन से काटा गया पीएफ अब तक उनके खातों में जमा नहीं हुआ है. इसके अलावा बढ़े हुए वेतन का भुगतान भी लंबित है. समय पर वेतन मिलना भी उनके लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है. कर्मियों ने 5 लाख रुपये के बीमा की मांग भी उठाई है.
मामला सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं है. कर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि बिना किसी सुरक्षा किट के उन्हें नालियों और गंदगी में उतरना पड़ता है. इस दौरान कीड़े-मकोड़ों के काटने और संक्रमण का खतरा बना रहता है, जबकि इलाज का खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ता है.
हड़ताली कर्मियों का गुस्सा नगर पंचायत प्रशासन पर भी साफ दिखा. उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी पर “सौतेला व्यवहार” करने का आरोप लगाया. कर्मियों के मुताबिक, समस्याएं लेकर जाने पर उनकी बात नहीं सुनी जाती और उन्हें कार्यालय से लौटा दिया जाता है.
कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी. हड़ताल का असर अब शहर में साफ नजर आने लगा है. जगह- जगह कूड़े के ढेर लगने लगे हैं और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अब बड़ा सवाल यही है- क्या नगर पंचायत प्रशासन समय रहते जागेगा, या गंदगी के साथ- साथ जनाक्रोश भी बढ़ता जाएगा.

