
सरायकेला: सरायकेला- खरसावां जिले में एक निजी स्विफ्ट डिजायर कार (निबंधन संख्या JH05EG-7398) को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. बताया जा रहा है कि मैरून रंग की इस कार पर झारखंड सरकार का बोर्ड लगा रहता है और इसमें अक्सर दो सरकारी कर्मियों को भ्रमण करते देखा जाता है. इनमें एक सरायकेला पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित एक दारोगा तथा दूसरे कल्याण विभाग के एक लिपिक बताए जा रहे हैं.


स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह वाहन कल्याण विभाग के लिपिक आशीष का है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि वाहन का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण के लिए किया जाता है. वहीं अवैध उगाही से जुड़े भी कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने आई है.
सोमवार को मामला उस समय चर्चा में आ गया, जब उक्त कार को गम्हरिया प्रखंड कार्यालय परिसर में उस वक्त देखा गया जब कार्यालय अवधि समाप्त हो चुकी थी. स्थानीय पत्रकार चंद्रमणि ने कथित तौर पर उक्त वाहन की तस्वीर ली और निजी वाहन पर सरकारी बोर्ड लगाने के संबंध में सवाल पूछा. आरोप है कि इस दौरान मौजूद दारोगा ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें उठवा लेने की धमकी दी. पत्रकार के अनुसार, उन्होंने ब्लॉक परिसर में मौजूद अन्य पत्रकारों से सहायता मांगी, लेकिन उनके पहुंचने के बाद भी दोनों वहां डटे रहे. बतौर चंद्रमणि उन्होंने अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और धमकी की जानकारी आदित्यपुर थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक को भी दी मगर उन्होंने सुध नहीं ली.

इस घटना के बाद पत्रकारों और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं. यदि वाहन निजी है, तो उस पर सरकारी बोर्ड लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई है. क्या संबंधित नियमों के तहत ऐसे वाहन को सरकारी वाहन जैसी सुविधा या वीआईपी लेन का उपयोग करने की अनुमति है. यदि ऐसा हो रहा है, तो इसकी वैधानिक स्थिति क्या है.
फिलहाल इन सभी आरोपों और सवालों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं यह भी स्पष्ट नहीं है कि पत्रकार द्वारा लगाए गए धमकी के आरोप को लेकर कोई लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं.
अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक पर हैं कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और निजी वाहन पर सरकारी बोर्ड के उपयोग तथा लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच होगी.






