सरायकेला: नगर पंचायत क्षेत्र में पिछले करीब एक सप्ताह से बिजली की अनियमित आपूर्ति ने शहरवासियों की परेशानी बढ़ा दी है. खासकर रात आठ बजे के बाद बिजली की स्थिति बेहद खराब होने की शिकायत सामने आ रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बिजली कुछ मिनट के लिए आती है और फिर अचानक चली जाती है. इसके बाद यही सिलसिला रातभर चलता रहता है.


बरसात के मौसम में बिजली की इस आंख-मिचौली ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. बिजली गुल होते ही घरों में अंधेरा, उमस और मच्छरों का प्रकोप शुरू हो जाता है. बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है. लोग बिजली आने का इंतजार करते हैं, पंखा चालू होता है और कुछ ही देर बाद फिर बिजली गुल हो जाती है.
मेंटेनेंस के बावजूद बार-बार फॉल्ट क्यों ?
बिजली व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल विभाग के नियमित रखरखाव पर उठ रहा है. शहरवासियों का कहना है कि हर साल बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने और तकनीकी खराबियों को दूर करने के नाम पर रखरखाव किया जाता है. इसके लिए मजदूरों और संसाधनों पर खर्च भी होता है, लेकिन इसके बावजूद शहर में बिजली की स्थिति सुधरने के बजाय लगातार खराब होती नजर आ रही है.
लोगों का सीधा सवाल है कि यदि नियमित रूप से रखरखाव किया जा रहा है, तो आखिर पिछले एक सप्ताह से रात के समय बिजली बार-बार क्यों बाधित हो रही है. क्या समस्या केवल अस्थायी रूप से ठीक की जा रही है या बिजली व्यवस्था की तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है?
आश्वासन से नाराज हैं शहरवासी
बिजली संकट को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी अब सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि बिजली की समस्या सामने आने के बाद जनप्रतिनिधि सक्रिय होते हैं और अधिकारियों से बातचीत कर जल्द समस्या दूर कराने का दावा किया जाता है. कभी दो दिन तो कभी तीन दिन में समस्या ठीक होने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता.
शहरवासियों का कहना है कि बिजली समस्या के समाधान से जुड़े दावे अब सिर्फ खबरों और बयानों तक सीमित होकर रह गए हैं. धरातल पर लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल रही है. यही वजह है कि अब लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है.
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
रात के समय लगातार बिजली आने-जाने से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है. बरसात के कारण वातावरण में उमस बढ़ी हुई है और बिजली गुल होने के बाद पंखे बंद हो जाने से घरों में रहना मुश्किल हो जाता है. दूसरी ओर, अंधेरे के साथ मच्छरों का प्रकोप भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है.
लोगों का कहना है कि समस्या सिर्फ बिजली कटने तक सीमित नहीं है. बार-बार बिजली आने और जाने से घरेलू विद्युत उपकरणों पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है. उपभोक्ताओं का कहना है कि नियमित बिजली बिल का भुगतान करने के बावजूद उन्हें स्थिर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है.
स्थायी समाधान की मांग
शहरवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को केवल आश्वासन देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. यदि किसी समस्या के जल्द समाधान का दावा किया जाता है तो उसकी निगरानी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.
लोग चाहते हैं कि बिजली विभाग के अधिकारी शहर में बार-बार खराब होने वाले क्षेत्रों और लाइनों को चिह्नित करें. तकनीकी खराबी की वास्तविक वजह सामने लाई जाए और उसके स्थायी समाधान के लिए ठोस योजना तैयार की जाए.
शहरवासियों ने यह भी मांग की है कि जनप्रतिनिधि बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या की समीक्षा करें और खराबी दूर करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कराएं. साथ ही, रखरखाव के नाम पर होने वाले खर्च का वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए.
जनता को अब आश्वासन नहीं, स्थायी राहत चाहिए
सरायकेला के लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को जनता ने केवल बयान देने के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराने के लिए चुना है. यदि एक सप्ताह से शहर की बिजली व्यवस्था प्रभावित है और लोग रात में बार-बार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, तो इस स्थिति की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.
अब सवाल सीधा है- आखिर सरायकेला की बिजली व्यवस्था कब सुधरेगी ? जनता को आश्वासन कब तक मिलता रहेगा और स्थायी समाधान कब मिलेगा ? यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो लगातार जारी यह आंख-मिचौली आने वाले दिनों में बड़े जनआक्रोश का कारण बन सकती है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

