गम्हरिया: सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र के मोतीनगर में पत्रकार सुनील कुमार गुप्ता और उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता पर हुए कथित जानलेवा हमले ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के बाद जहां पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश है, वहीं पूरे मामले को कथित अवैध खटाल संचालन, वन विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर भी देखा जा रहा है.


उल्लेखनीय है कि रविवार शाम पत्रकार सुनील कुमार गुप्ता बाजार से अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान कुछ लोगों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. पिता को बचाने पहुंचे उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता को भी आरोपियों ने बुरी तरह पीट दिया. स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद दोनों को हमलावरों के चंगुल से छुड़ाया गया और पुलिस की मदद से इलाज के लिए गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया.
घटना में प्रकाश कुमार यादव, दिनेश कुमार यादव, नीरज कुमार यादव समेत अन्य लोगों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है. बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले वन विभाग के कर्मी क्षेत्र में संचालित कथित अवैध खटाल से जुड़े मामले में पूछताछ करने पहुंचे थे. इसके बाद हुए हमले ने पूरे घटनाक्रम को और भी संदिग्ध बना दिया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोतीनगर क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर वर्षों से खटाल संचालित हो रहे हैं. कई बार नोटिस जारी होने की बातें सामने आती रही हैं, लेकिन आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी जमीन पर यह गतिविधियां किसके संरक्षण में चल रही थीं. यदि जमीन पर अवैध कब्जा था तो उसे हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि नहीं था तो बार-बार नोटिस जारी करने की नौबत क्यों आई ?
घटना के बाद अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या वन विभाग की पूछताछ के बाद किसी तरह का तनाव उत्पन्न हुआ था ? क्या किसी ने हमलावरों को उकसाने का काम किया ? हालांकि इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है. घटना से पूर्व का एक ऑडिओ क्लिप भी सामने आया है जिसमें कथित हमलावर पत्रकार को यह कहते हुए खुली धमकी दे रहा है कि यदि दुबारा वन विभाग उसके खटाल में आता है तो यह तुम्हारे लिए अंतिम शिकायत होगा. ऑडियो में कई बार धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया गया है. ऑडियो क्लिप कई सूत्रों से पुलिस तक पहुंच चुकी है.
इस बीच प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला- खरसावां ने घटना की कड़ी निंदा की है. प्रेस क्लब के महासचिव प्रमोद सिंह ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि पत्रकार पर हमला लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच सेतु का काम करते हैं. यदि जनहित के मुद्दों को उठाने वाले पत्रकारों को ही निशाना बनाया जाएगा तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति होगी.
प्रेस क्लब ने पुलिस प्रशासन से सभी आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. महासचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला- खरसावां के नेतृत्व में पत्रकार आदित्यपुर थाना के समक्ष धरना- प्रदर्शन करेंगे और आगे की रणनीति तय की जाएगी.
फिलहाल आदित्यपुर पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. लेकिन अब सवाल सिर्फ एक हमले का नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र का है जिसके बीच यह घटना घटी. पत्रकारों की नजर पुलिस कार्रवाई पर है, जबकि आम लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अवैध खटाल, सरकारी जमीन और हमले के पीछे की पूरी सच्चाई आखिर कब सामने आएगी.

