सरायकेला: जिले में एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है. सर्पदंश से मृत बालक के परिजन को मिली सरकारी मुआवजा राशि में कथित अवैध वसूली और इस मुद्दे को उठाने वाले पदाधिकारी के निष्कासन को लेकर मामला गरमा गया है.

गम्हरिया प्रखंड के कांड्रा निवासी संगीता दास ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र अंश दास की सर्पदंश से मृत्यु के बाद मिली 4 लाख रुपये की सहायता राशि में से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के जिला अध्यक्ष दीपक महतो द्वारा 1 लाख रुपये की अवैध मांग की गई. पीड़िता का आरोप है कि उनसे जबरन एसबीआई का चेक भी लिया गया और पैसे नहीं देने पर मुआवजा वापस करवाने की धमकी दी गई.
बताया गया कि पीड़िता ने 21 अप्रैल 2026 को इस मामले में पूर्व प्रत्याशी प्रेम मंडी को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी. इसी बीच पार्टी ने गम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष रहे गोपाल चंद्र महतो को अनुशासनहीनता और संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में पद से निष्कासित कर दिया.
निष्कासन के बाद गोपाल चंद्र महतो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने एक पीड़ित महिला के साथ हो रही कथित वसूली का विरोध किया था. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब और शोकग्रस्त परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश करना अपराध है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चाई उजागर होने से रोकने के लिए उन्हें साजिश के तहत बदनाम किया गया और पार्टी से बाहर किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीड़ितों के हक के लिए आवाज उठाना अपराध है, तो वह इसे बार- बार करने को तैयार हैं.
इस पूरे घटनाक्रम ने जहां पीड़ित परिवार के साथ संभावित शोषण के आरोपों को गंभीर बना दिया है, वहीं JLKM के अंदरूनी हालात और संगठनात्मक पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. अब नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व और प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है. इधर जेएलकेएम का बड़ा वर्ग जिलाध्यक्ष के खिलाफ गोलबंद हो गया है जिससे पार्टी और संगठन दोनों की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिले में उभरे इस विवाद पर क्या संज्ञान लेता है.

