सरायकेला: व्यवसाय को केवल मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाकर सरायकेला के जामवंती डेरी के संचालक एवं समाजसेवी राजेश साहू पिछले 30 वर्षों से एक मिसाल कायम कर रहे हैं. उन्होंने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि यदि सोच सेवा की हो तो कारोबार भी समाज के लिए वरदान बन सकता है. वर्तमान में उनके माध्यम से करीब 150 परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है.



बुधवार को लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राजेश साहू ने डेरी से जुड़े सभी मजदूरों के बीच छातों का वितरण किया. इस दौरान उन्होंने श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए हर मौसम में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया.
राजेश साहू के यहां कार्यरत कर्मचारियों के लिए केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि हर सुख-दुख में सहयोग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है. किसी कर्मचारी के घर शादी-विवाह का अवसर हो या परिवार में बीमारी जैसी विपरीत परिस्थिति, वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक और सामाजिक सहयोग करते हैं. कई जरूरतमंद कर्मचारियों के इलाज का खर्च भी वे स्वयं वहन करते हैं. यही कारण है कि उनके यहां कार्य करने वाले लोग उन्हें मालिक नहीं, बल्कि अपने परिवार का अभिभावक मानते हैं.
जामवंती डेरी की एक और विशेषता यह है कि यहां उत्पादित दूध लोगों तक ‘न लाभ, न हानि’ के सिद्धांत पर उपलब्ध कराया जाता है. राजेश साहू का कहना है कि दूध जैसी आवश्यक वस्तु प्रत्येक परिवार तक उचित मूल्य पर पहुंचे, यही डेरी संचालन का मुख्य उद्देश्य है.
रोजगार सृजन के प्रति उनकी सोच कृषि कार्यों में भी दिखाई देती है. उन्होंने लगभग 90 बीघा भूमि पर खेती की व्यवस्था की है, लेकिन आधुनिक मशीनों के बजाय अधिक से अधिक मजदूरों से कार्य कराया जाता है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता रहे. उनका मानना है कि मशीनों के अत्यधिक उपयोग से गरीब मजदूरों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
राजेश साहू ने कहा कि भगवान ने उन्हें जरूरतमंदों की सेवा करने का अवसर दिया है. पिछले 30 वर्षों से उनका प्रयास रहा है कि उनके साथ जुड़े किसी भी परिवार को कठिन समय में अकेला महसूस न हो. उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कमाई धन नहीं, बल्कि लोगों का विश्वास, आशीर्वाद और दुआएं हैं. जब तक भगवान शक्ति देंगे, तब तक सेवा का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा.
प्रमोद सिंह (संपादक)





