सरायकेला: जिले के शिक्षा विभाग में आउटसोर्स कर्मियों की नाराजगी सोमवार को खुलकर सामने आ गई. जहां पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिलने और जिला शिक्षा पदाधिकारी के कथित तानाशाही रवैये से नाराज MIS, BRP और BPM समेत आउटसोर्स कर्मियों ने उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक का बहिष्कार कर दिया.


कर्मियों का आरोप है कि चार महीने से वेतन लंबित रहने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. बार- बार समस्या उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं निकल रहा है. इसके साथ ही उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी पर मनमाने तरीके से काम करने और कर्मियों को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है. हालांकि इन आरोपों पर जिला शिक्षा पदाधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है.
लिखित में दी बैठक के बहिष्कार की सूचना
नाराज कर्मियों ने समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होने के अपने निर्णय की जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखित रूप से दी है. कर्मियों का कहना है कि वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी और उनकी समस्याओं की कथित अनदेखी के कारण उन्हें विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा.
उपायुक्त की अध्यक्षता वाली विभागीय समीक्षा बैठक का आउटसोर्स कर्मियों द्वारा बहिष्कार किया जाना अब प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है. जिस बैठक में शिक्षा विभाग की योजनाओं, कार्यों और प्रगति की समीक्षा होनी थी, उसी विभाग से जुड़े कर्मियों ने अपनी समस्याओं को लेकर बैठक से दूरी बना ली.
चार महीने का वेतन आखिर क्यों लंबित ?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल चार महीने से लंबित वेतन को लेकर है. भुगतान किस स्तर पर और किन कारणों से रुका है, इसकी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है. साथ ही कर्मियों द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी की कार्यशैली को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता भी जांच का विषय है.
अब निगाहें उपायुक्त और जिला प्रशासन के अगले कदम पर हैं. क्या लंबित वेतन भुगतान की बाधा दूर होगी? क्या आउटसोर्स कर्मियों की शिकायतों को सुनने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल होगी ? और जिला शिक्षा पदाधिकारी पर लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष क्या है ? इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.
प्रमोद सिंह (संपादक)

