सरायकेला: नाबालिग के साथ गलत नीयत से छेड़छाड़ के मामले में अदालत ने 65 वर्षीय आरोपी मिथलेश कुमार तिवारी को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमाशंकर सिंह की अदालत ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है. जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.


इसी मामले में अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354(ए) के तहत भी आरोपी को दो वर्ष के कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. अदालत ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है.
मामला आरआईटी थाना क्षेत्र से जुड़ा है. प्राथमिकी के अनुसार घटना 26 अप्रैल 2024 की सुबह करीब 5:30 बजे की है. नाबालिग फूल तोड़ने के लिए गई थी. इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और बातचीत के दौरान कथित रूप से गलत नीयत से उसके शरीर को छूने लगा.
पीड़िता वहां से भागकर घर पहुंची और अपने माता-पिता को घटना की जानकारी दी. इसके बाद सोसाइटी में बैठक कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया. पुलिस के अनुसार, बैठक के दौरान आरोपी ने घर छोड़कर कहीं अन्यत्र चले जाने की बात कही थी. आरोप है कि बैठक में सहमति बनने के बावजूद आरोपी ने सोसाइटी नहीं छोड़ी और वहीं रहने लगा. पीड़िता जब भी उसे देखती थी तो डर जाती थी. परिवार की ओर से आरोपी को वहां से चले जाने के लिए कई बार कहा गया, लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं आया.
इसके बाद पीड़िता के पिता ने 14 अक्टूबर 2024 को आरआईटी थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.
उम्र नहीं आई कानून के आड़े
अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में आरोपी की उम्र कानून की जवाबदेही से बचने का आधार नहीं बनती. पॉक्सो अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर अदालत द्वारा सुनाई गई सजा ऐसे मामलों में कानून की गंभीरता को भी रेखांकित करती है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

