
सरायकेला: विश्वविख्यात छऊ परंपरा ने अपना एक और अनमोल सितारा खो दिया. वरिष्ठ छऊ नर्तक एवं छऊ साधक जयंत लाल रथ का 75 वर्ष की आयु में मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित उनके आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. उनके निधन की खबर मिलते ही सरायकेला सहित पूरे छऊ कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई. कलाकारों, संस्कृति प्रेमियों और रथ परिवार ने इसे छऊ परंपरा की अपूरणीय क्षति बताया है.


जयंत लाल रथ पूर्व सरायकेला रियासत के स्टेट काउंसिल के सचिव स्वर्गीय केदारनाथ रथ के छोटे पुत्र थे. बचपन से ही उन्हें कला और संस्कृति का समृद्ध वातावरण मिला, जिसे उन्होंने जीवनभर संजोकर रखा. उन्होंने सरायकेला छऊ की परंपरा को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसकी गरिमा बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.
वे मंच पर अपने प्रभावशाली अभिनय, सधे हुए नृत्य और अनुशासित प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे. उनकी पहचान केवल एक कलाकार के रूप में नहीं, बल्कि छऊ परंपरा के समर्पित संरक्षक के रूप में भी रही. उन्होंने देश के विभिन्न मंचों पर सरायकेला छऊ का प्रतिनिधित्व किया और अपनी कला से इस परंपरा को नई पहचान दिलाने में योगदान दिया.
व्यावसायिक जीवन में जयंत लाल रथ ने ओडिशा के राजगंगपुर स्थित ओसीएल सीमेंट फैक्ट्री में उप प्रबंधक के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दीं. नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद उनका जुड़ाव छऊ कला से कभी कम नहीं हुआ. वे जहां भी रहे, वहां सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का प्रयास करते रहे.
उनके निधन के बाद इंदौर में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके ज्येष्ठ पुत्र एवं अभियंता कृष्णेंदु रथ ने मुखाग्नि दी. अंतिम विदाई के दौरान परिवार, शुभचिंतकों और कला जगत से जुड़े लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
जयंत लाल रथ का निधन केवल एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अवसान है. उनकी साधना, कला के प्रति समर्पण और छऊ के संरक्षण में दिया गया योगदान हमेशा याद किया जाएगा. आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में स्मरण करेंगी, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी छऊ की प्रतिष्ठा और परंपरा को समर्पित कर दी.
प्रमोद सिंह (संपादक)





