गम्हरिया: आदित्यपुर थाना क्षेत्र के मोतीनगर में पत्रकार सुनील गुप्ता और उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता पर हुए कथित जानलेवा हमले के बाद मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है. सोमवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता केपी सोरेन पीड़ित पत्रकार के आवास पहुंचे और दोनों का हालचाल जाना. इस दौरान उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली तथा घटना को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया.


केपी सोरेन ने कहा कि पत्रकार समाज की आवाज होते हैं और जनहित के मुद्दों को उठाने का काम करते हैं. ऐसे में किसी पत्रकार या उसके परिवार पर हमला होना बेहद चिंताजनक और निंदनीय है. उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

वन विभाग का वह जमीन जिसपर अवैध रूप से खटाल का संचालन हो रहा है.
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पूरे विवाद की जड़ वन विभाग की जमीन पर वर्षों से संचालित कथित अवैध खटाल है. आरोप है कि मोतीनगर क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध कब्जा कर कुछ लोग लंबे समय से खटाल संचालन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं. इसी मामले को लेकर क्षेत्र में विवाद की स्थिति बनी हुई है.
हमले के मामले में प्रकाश कुमार यादव, दिनेश कुमार यादव, नीरज कुमार यादव समेत अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं. केपी सोरेन ने कहा कि यदि वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से खटाल संचालित हो रहा है तो यह भी जांच का विषय है कि आखिर इतने वर्षों से यह गतिविधि किसके संरक्षण में चल रही थी और संबंधित विभागों ने अब तक क्या कार्रवाई की. उन्होंने कहा कि इस मामले को गंभीरता से उठाया जाएगा. जल्द ही वे वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) और अंचल अधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
झामुमो नेता ने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा देते हुए कहा कि उनकी संवेदना पत्रकार सुनील गुप्ता और उनके परिवार के साथ है. जहां भी जरूरत पड़ेगी, वे उनके समर्थन में खड़े रहेंगे. उन्होंने पुलिस प्रशासन से भी मामले में शीघ्र कार्रवाई कर दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की. इस मौके पर बीटी दास व अन्य मौजूद रहे.
उधर पत्रकार पर हुए हमले को लेकर जिले के पत्रकारों और विभिन्न संगठनों में भी आक्रोश व्याप्त है. सभी की नजर अब पुलिस की कार्रवाई और अवैध खटाल से जुड़े आरोपों की जांच पर टिकी हुई है. इस घटना ने न केवल पत्रकार सुरक्षा बल्कि सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे के मुद्दे को भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. प्रेस क्लब ऑफ़ सरायकेला- खरसावां इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है और आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है.

