पटना: जिले के लई गांव में ग्रामवासियों के सहयोग से करीब 30 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित कुशवाहा पंचायत परिषद भवन का पुरेंद्र नारायण सिंह ने विधिवत उद्घाटन किया. उद्घाटन से पूर्व सुबह 11 बजे नवनिर्मित भवन में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और प्रसाद वितरण किया गया.


समारोह को संबोधित करते हुए पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि कुशवाहा समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है. समाज सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, महात्मा गौतम बुद्ध, माता सावित्रीबाई फुले और शहीद जगदेव प्रसाद जैसे महापुरुषों के विचारों एवं आदर्शों से प्रेरणा लेता है. इन महापुरुषों ने मानवता, शांति, समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया.
उन्होंने कहा कि समाज को केवल महापुरुषों के नाम पर गर्व करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को सामाजिक जीवन और व्यवहार में उतारने की जरूरत है.
शहीद जगदेव प्रसाद के सपनों का समाज बनाना होगा
पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि शहीद जगदेव प्रसाद का सपना सामाजिक बराबरी, न्याय और वंचितों को उनका अधिकार दिलाने का था. इसे साकार करने के लिए शिक्षा, संगठन और सामाजिक चेतना को प्राथमिकता देनी होगी.

उन्होंने कहा कि कुशवाहा समाज की भूमिका केवल अपने समाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए. कमजोर, पिछड़े, दलित, शोषित और वंचित वर्गों को साथ लेकर उनके अधिकार, सम्मान और विकास के लिए भी आगे आना होगा. उन्होंने नवनिर्मित कुशवाहा भवन को सामाजिक एकता, शिक्षा, विचार-विमर्श और रचनात्मक गतिविधियों का केंद्र बनाने की अपील की.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री जयंत राज कुशवाहा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुशवाहा मौजूद रहे. इसके अलावा मुखिया अजीत कुशवाहा, उमेश कुमार कुशवाहा, विभूति कुमार, प्रोफेसर सुशीला देवी और पंचायत समिति सदस्य नीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
कुशवाहा कल्याण परिषद भवन कमेटी के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष श्याम बाबू सिंह, सचिव नीतीश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष जयशंकर सिंह, उप कोषाध्यक्ष विश्वजीत कुमार सिंह सहित कमेटी के सदस्यों और ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया.
समारोह में शिवदयाल सिंह, राधे कृष्णा सिंह, सुबोध कुमार सिंह, सुमन कुमार सिंह, आनंद कुमार सिंह, दिनेश कुमार सिंह, शिवकुमार सिंह, राजद प्रदेश महासचिव देव प्रकाश, अधिवक्ता संजय कुमार सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे.

