सरायकेला: निखार सबलोक हत्याकांड की जांच जैसे- जैसे आगे बढ़ रही है, इसकी परतें हत्या की वारदात से कहीं आगे जाती दिखाई दे रही हैं. खाकी, खादी, नौकरशाही और मीडिया जगत से जुड़े सवालों के बीच अब कोलकाता कनेक्शन सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक SIT ने कोलकाता के बेलियाघाटा ट्रैफिक गार्ड में तैनात एक ट्रैफिक सार्जेंट और एक सिविल वॉलंटियर को हिरासत में लिया है. हालांकि इस संबंध में पुलिस की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है.


पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि जांच एजेंसी को महिला पुलिसकर्मी और हत्याकांड के कथित सरगना अशोक सिंह राघव के बीच चैटिंग से जुड़े साक्ष्य मिले हैं. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या महिला ट्रैफिक सार्जेंट ने शूटरों तक किसी तरह की लोकेशन या दूसरी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने में मदद की थी. महिला पुलिसकर्मी और राघव के बीच व्यक्तिगत संबंधों को लेकर भी कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. मगर दावा किया जा रहा है कि महिला पुलिसकर्मी राघव की खास है.
राघव समेत सात गिरफ्तार, SIT जोड़ रही हत्या की कड़ियां
निखार सबलोक हत्याकांड में अब तक अशोक सिंह राघव, कथित शूटर अंकित सिंह, अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू, सुशील केराई, सुनील रजक, रितेश सिंह और राजकुमार सिंह उर्फ प्रिंस की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार SIT को अब तक की जांच में ऐसे कई साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर अशोक सिंह राघव को हत्या की साजिश के केंद्र में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है. जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कड़ियां भी जोड़ रही है. इसी क्रम में Meta से मांगी गई रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है. रिपोर्ट मिलने के बाद कथित चैट, संपर्क और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड की पुष्टि होने पर जांच को और मजबूती मिल सकती है.
राघव के बयान में अखिलेश का नाम, मगर साक्ष्य का इंतजार
इस हत्याकांड का एक महत्वपूर्ण पहलू दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह की कथित भूमिका को लेकर है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक राघव ने अपने कथित इकबालिया बयान में अखिलेश सिंह के इशारे पर निखार की हत्या कराने की बात कही है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब तक की जांच में अखिलेश सिंह की सीधी संलिप्तता स्थापित करने वाला स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है. यही वजह है कि SIT केवल कथित बयान के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ने में लगी है. Meta की रिपोर्ट इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
राघव की संपत्ति और कथित नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश
मामले की जांच अब केवल हत्या की साजिश और शूटरों तक सीमित नहीं बताई जा रही है. राघव की संपत्तियों, आर्थिक स्रोतों और उससे जुड़े कथित नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. साथ ही विक्रम शर्मा द्वारा खड़े किए गए कथित कारोबार एवं मीडिया नेटवर्क, सोशल मीडिया समूह और अंग्रेजी अखबार की फंडिंग के स्रोतों की जांच भी चर्चा में है. यह दावा भी सामने आया है कि SIT ने चांडिल अनुमंडल न्यायालय के समक्ष कुछ पहलुओं की जांच के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन अपेक्षित अनुमति नहीं मिली. पुलिस अब उपलब्ध कानूनी रास्तों के जरिए आर्थिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी बताई जा रही है.
मीडिया और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तक क्यों पहुंच रहे सवाल ?
हत्याकांड के बाद जमशेदपुर के मीडिया जगत के कुछ हिस्सों और सूचना एवं जनसंपर्क व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. राघव और उसके कथित मीडिया नेटवर्क के प्रभाव, संपर्क और गतिविधियों को लेकर कई तरह के दावे सामने आए हैं. ऐसे में जांच का बड़ा सवाल यह भी है कि यदि कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था तो उसे संस्थागत स्तर पर किसका संरक्षण या सहयोग मिला और कौन लोग केवल पेशेवर संपर्क में थे.
हत्या से आगे नेटवर्क की जांच पर टिकी निगाह
निखार सबलोक हत्याकांड अब एक व्यक्ति की हत्या और उसके शूटरों की गिरफ्तारी भर का मामला नहीं रह गया है. जांच की दिशा यदि सामने आ रहे दावों और डिजिटल साक्ष्यों तक पहुंचती है तो यह साफ हो सकता है कि हत्या की योजना किसने बनाई, किसने शूटरों को सहायता पहुंचाई, आर्थिक संसाधन कहां से आए और कथित नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था. फिलहाल कई गंभीर दावे पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं. SIT की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस, कोलकाता से हिरासत में ली गई महिला ट्रैफिक सार्जेन्ट और सिविल वोलिंटियर की कानूनी स्थिति और Meta से मिलने वाले डिजिटल रिकॉर्ड के बाद ही इस हत्याकांड की अगली तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी.

