जामताड़ा: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र जामताड़ा में सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. जिले में गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं. कहीं घायल मरीजों को ट्रैक्टर, तो कहीं टोटो और ऑटो से अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी की खबरें सुर्खियां बनती रही हैं. अब सदर अस्पताल से सरकारी एंबुलेंस में एक्स-रे मशीन ले जाने का मामला सामने आया है. आरोप है कि अस्पताल की एक्स-रे मशीन को एंबुलेंस में लादकर कोर्ट रोड स्थित किसी निजी कार्य के लिए ले जाया गया. इस दौरान अस्पताल में कार्यरत एक्स-रे टेक्नीशियन किरण कुमार भी मौजूद थे. मामले ने अस्पताल के संसाधनों के इस्तेमाल और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


मरीजों की सुविधा के लिए मशीन, निजी काम में इस्तेमाल का आरोप
सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सदर अस्पताल में आम और गरीब मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध एक्स-रे मशीन को एंबुलेंस में लादकर अस्पताल परिसर से बाहर ले जाया गया. यदि उसी दौरान किसी गंभीर मरीज को तत्काल एक्स-रे जांच की आवश्यकता पड़ती, तो उसकी जांच कैसे होती? यह सवाल अब उठने लगा है. सरकारी एंबुलेंस और अस्पताल में उपलब्ध महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण का इस्तेमाल किसके आदेश पर और किस उद्देश्य से किया गया, इसकी जांच जरूरी है.

अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा संसाधन मरीजों की सुविधा के लिए हैं. ऐसे में एक्स-रे मशीन को अस्पताल से बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी, क्या इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ था और मशीन कहां तथा किस काम के लिए ले जाई गई, यह जांच का विषय है.
टेक्नीशियन ने बताया- मरम्मत के लिए ले गए थे मशीन
मशीन को एंबुलेंस से उतारने के दौरान एक्स-रे टेक्नीशियन किरण कुमार ने बताया कि मशीन को मरम्मत कराने के लिए ले जाया गया था। हालांकि, इस दावे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं. यदि मशीन खराब थी और उसे मरम्मत के लिए भेजा गया था, तो क्या इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को थी? मशीन को मरम्मत के लिए भेजने की अनुमति किसने दी थी? इसके लिए कोई लिखित आदेश या संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं? इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है.
उपाधीक्षक को जानकारी नहीं, पत्रकार के बताने पर संज्ञान
मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रभात सिन्हा ने पत्रकार द्वारा जानकारी दिए जाने पर मामले की जानकारी लेने की बात कही. इससे अस्पताल में उपलब्ध महत्वपूर्ण उपकरणों की आवाजाही और उनके इस्तेमाल की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यदि मशीन मरम्मत के लिए ले जाई गई थी, तो अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी थी या नहीं, यह जांच में स्पष्ट हो सकेगा.
इंडिया न्यूज वायरल बिहार झारखंड के पास अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. प्रभात सिन्हा के साथ हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद होने की बात कही गई है. वहीं, सिविल सर्जन डॉ. एसके मिश्रा से संपर्क किए जाने पर उन्होंने रांची में बैठक में होने की जानकारी दी.
16 जुलाई की घटना भी चर्चा में
गौरतलब है कि सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं. बीते 16 जुलाई को बेहतर इलाज नहीं मिलने के आरोप के बीच आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की थी. घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था. उस घटना ने भी अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल खड़े किए थे.
जिले में एंबुलेंस की उपलब्धता को लेकर उठती शिकायतों के बीच यदि अस्पताल के संसाधनों के इस्तेमाल में नियमों का पालन नहीं होता है, तो इससे मरीजों की परेशानी बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
उपायुक्त ने मामले को गंभीर बताया
मामला उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इसे गंभीर बताया और कार्रवाई की बात कही. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी एंबुलेंस के निजी उपयोग और एक्स-रे मशीन को अस्पताल से बाहर ले जाने के मामले में क्या जांच होती है और संबंधित लोगों की भूमिका सामने आने पर क्या कार्रवाई की जाती है.
फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि मशीन को अस्पताल से बाहर ले जाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था, क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला नियमित मरम्मत की प्रक्रिया का था या सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल में किसी तरह की अनियमितता हुई.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

