जामताड़ा: जामताड़ा रेलवे स्टेशन परिसर में आयोजित होने वाली लक्खी पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि रेलकर्मियों की आस्था और आठ दशकों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है. वर्ष 1946 से लगातार स्टेशन परिसर में लक्खी पूजा के साथ मेले का आयोजन होता आ रहा है. करीब 80 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को रेलकर्मी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाते आ रहे हैं.


समय के साथ परिस्थितियां बदलीं, लेकिन लक्खी पूजा की परंपरा आज भी कायम है. इस वर्ष मेले का स्वरूप पहले की तुलना में छोटा रहा, इसके बावजूद रेलकर्मियों ने आयोजन की निरंतरता बनाए रखी. पूजा और मेले का आयोजन बंद नहीं होने दिया गया. यह दर्शाता है कि रेलकर्मियों के लिए यह आयोजन केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है.
रेलकर्मियों के सामूहिक प्रयास से कायम है परंपरा
जामताड़ा रेलवे स्टेशन परिसर में लक्खी पूजा के आयोजन में रेलकर्मियों की सामूहिक भागीदारी हमेशा महत्वपूर्ण रही है. इस वर्ष भी पूजा के सफल आयोजन में स्टेशन प्रबंधक एसके पासवान, आरपीएफ इंस्पेक्टर शरद कुमार सुमन, स्टेशन मास्टर विनय सिंह सहित अन्य रेलकर्मियों का सहयोग रहा.

रेलवे स्टेशन परिसर में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब जामताड़ा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है. वर्ष 1946 में शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है. मेले का स्वरूप छोटा होने के बावजूद पूजा का आयोजन जारी रखकर रेलकर्मियों ने पुरानी परंपरा के प्रति अपनी आस्था और प्रतिबद्धता का परिचय दिया.
आठ दशकों की आस्था का प्रतीक
जामताड़ा स्टेशन पर लक्खी पूजा का लगातार आयोजन पुरानी परंपराओं को सहेजने की मिसाल है. बदलते समय और परिस्थितियों के बीच रेलकर्मियों ने इस धार्मिक आयोजन की निरंतरता बनाए रखी है. आठ दशकों से जारी यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनी हुई है.
रिपोर्ट: मनीष वर्णवाल

