आदित्यपुर: औद्योगिक सुरक्षा को केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित रखने के बजाय दुर्घटनाओं की रोकथाम, गंभीर जोखिमों की समय रहते पहचान और तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर देते हुए सोमवार को होटल क्रूज में CII Jharkhand Safety Talk 2026 के सातवें संस्करण की शुरुआत हुई. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) झारखंड की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के पहले दिन उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और देश-विदेश के सुरक्षा विशेषज्ञों ने कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया.


कार्यक्रम में 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि 50 से अधिक प्रदर्शकों ने औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ी तकनीक और समाधान प्रदर्शित किए. पहले दिन प्रोसेस सेफ्टी, ऊंचाई पर काम के दौरान सुरक्षा, गंभीर औद्योगिक जोखिम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रियल टाइम मॉनिटरिंग, सड़क सुरक्षा और नेतृत्व की जवाबदेही जैसे विषय प्रमुख रहे.
‘सिर्फ PPE और चेकलिस्ट पर्याप्त नहीं’
CII ईस्टर्न रीजन सेफ्टी सब-कमेटी के चेयरमैन एवं टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी राजीव मंगल ने उद्योगों से केवल औपचारिक अनुपालन वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर तकनीक आधारित ‘क्रिटिकल रिस्क कंट्रोल’ अपनाने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा कि पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE) ने सामान्य चोटों को कम करने में भूमिका निभाई है, लेकिन गंभीर और जानलेवा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय एवं वास्तविक समय पर काम करने वाली सुरक्षा प्रणाली जरूरी है. उन्होंने भारी वाहनों के लिए प्रॉक्सिमिटी सेंसर और चलती मशीनों में पॉजिटिव आइसोलेशन सेंसर जैसी तकनीकों का उदाहरण दिया.
मंगल ने बड़ी औद्योगिक इकाइयों से MSME को सुरक्षा मानक मजबूत करने में सहयोग देने की भी अपील की. उन्होंने जमशेदपुर में सफल सुरक्षा उपायों को दूसरे उद्योगों में अपनाने तथा CII के सुरक्षा अभियान को धनबाद, बोकारो और रांची जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक विस्तार देने पर जोर दिया.
‘उत्पादन का कोई लक्ष्य इंसानी जिंदगी से बड़ा नहीं’
CII झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन एवं वैदेही मोटर्स के निदेशक दिलो परिख ने कहा कि औद्योगिक विकास और मानव सुरक्षा को साथ लेकर चलना होगा. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनियाभर में हर साल करीब 30 लाख लोगों की काम से संबंधित कारणों से मृत्यु होती है और खराब सुरक्षा व्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ता है.

उन्होंने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में 50 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता विभिन्न विषयों पर विचार रखेंगे. ऊंचाई पर काम, सीमित स्थानों में सुरक्षा, AI आधारित सड़क सुरक्षा, प्रोसेस सेफ्टी, MSME जोखिम, थकान, गर्मी से होने वाला तनाव और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को एजेंडे में शामिल किया गया है.
‘सुरक्षा आदत बने, केवल अधिकारी को देखकर पालन न हो’
CII झारखंड स्टेट काउंसिल के वाइस चेयरमैन एवं टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कॉरपोरेट सर्विसेज डीबी सुंदरा रामम ने सुरक्षा को संगठन की संस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा ऐसी स्वाभाविक आदत बननी चाहिए, जिसे कर्मचारी केवल पर्यवेक्षक या अधिकारी की मौजूदगी में नहीं बल्कि हर परिस्थिति में अपनाएं. उन्होंने कार्यस्थल के साथ कर्मचारियों के आवागमन के दौरान सड़क सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई.

उन्होंने झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं में सालाना औसतन करीब 4,200 मौतों का उल्लेख करते हुए सुरक्षा को 24 घंटे की जिम्मेदारी के रूप में देखने की बात कही. साथ ही भविष्य में इस तरह के आयोजन को रांची तक विस्तार देने का सुझाव दिया.
AI और डिजिटल ट्विन से जोखिम पहचानने पर जोर
CII झारखंड सेफ्टी पैनल के संयोजक एवं टाटा स्टील के चीफ सेफ्टी नीरज कुमार सिन्हा ने कहा कि औद्योगिक विकास की रफ्तार के साथ सुरक्षा प्रणालियों को भी विकसित करना होगा. उनके अनुसार चुनौती केवल सुरक्षा नियम बनाने की नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर उनका लगातार और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने की है.
उन्होंने AI और डिजिटल ट्विन जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए उपलब्ध डेटा को दुर्घटना रोकने वाली कार्रवाई में बदलने पर जोर दिया. गर्मी, मानसिक दबाव और थकान जैसे मानवीय पहलुओं को भी औद्योगिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई.
कार्यक्रम में सुरक्षा ऑडिट के लिए आगे आने वाले 10 MSME को ‘सेफ्टी चेंज एजेंट’ के रूप में सम्मानित किए जाने की जानकारी भी दी गई.
बोर्डरूम की रणनीति का हिस्सा बने सुरक्षा
CII जमशेदपुर जोनल काउंसिल के वाइस चेयरमैन एवं टाटा स्टील UISL के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने कहा कि जमशेदपुर जैसे भारी उद्योग, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण गतिविधियों वाले क्षेत्र में आर्थिक विकास तभी टिकाऊ हो सकता है, जब उत्पादन से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो.
उन्होंने दुर्घटना होने के बाद कारण तलाशने की व्यवस्था के बजाय पहले से जोखिम की पहचान और उसे नियंत्रित करने वाली इंजीनियरिंग व्यवस्था पर जोर दिया.
CEO सत्र में शीर्ष उद्योग प्रतिनिधियों ने रखे विचार
‘CEO Leadership: Safety as a Boardroom Strategy – From Zero Harm to Operational Resilience’ विषय पर आयोजित सत्र में सुरक्षा को कंपनी की रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाने पर चर्चा हुई. सत्र का नेतृत्व राजीव मंगल ने किया.
इस दौरान JCAPCPL के एमडी कपिल मोदी, TRF लिमिटेड के एमडी यूके सिंह, जेमिपोल की एमडी स्वास्तिका बसु, यूनाइटेड एयर एक्सप्रेस के एमडी दिनेश सोंथालिया, BMW इंडस्ट्रीज के एमडी हर्ष बंसल, टाटा कमिंस के प्लांट हेड एवं डायरेक्टर अजितेश मोंगा और टाटा पिगमेंट्स के एमडी सरोज बनर्जी ने अपने विचार रखे.

चर्चा में ठेका कर्मियों की सुरक्षा, गंभीर जोखिमों की पहचान, कर्मचारियों को खतरे की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने, सुरक्षा में निवेश और उत्पादन निरंतरता के बीच संबंध जैसे विषय सामने आए.
देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा की तकनीक
पहले दिन ब्रिटेन के फिलिप हिग्स, इंटरनेशनल पावर्ड एक्सेस फेडरेशन के जेसन वुड्स और लक्जमबर्ग के फॉलप्रोटेक के सीईओ रेमी टिमरमैन्स सहित कई भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
तकनीकी सत्रों में एल्युमिनियम टावर के सुरक्षित उपयोग, प्रोसेस सेफ्टी, AI आधारित सुरक्षा, इंटेलिजेंट अलर्ट, रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऊंचाई पर काम के दौरान जोखिम नियंत्रण और पावर्ड एक्सेस उपकरणों की जांच जैसे विषयों पर चर्चा हुई.
दो दिवसीय CII Jharkhand Safety Talk का केंद्रीय संदेश यही रहा कि औद्योगिक सुरक्षा को केवल दुर्घटना के बाद जांच या कानूनी अनुपालन तक सीमित न रखा जाए. जोखिम को पहले पहचानने, तकनीक और इंजीनियरिंग नियंत्रण के जरिए उसे रोकने तथा शीर्ष प्रबंधन से लेकर कार्यस्थल तक सुरक्षा की साझा जवाबदेही विकसित करने की दिशा में उद्योगों को आगे बढ़ना होगा.

