जामताड़ा: किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया महतो (बड़ा) तालाब का जीर्णोद्धार अब स्थानीय किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है. तालाब की खुदाई के दौरान निकाली गई मिट्टी आसपास के रैयती खेतों में डाल दिए जाने से जल निकासी बाधित हो गई है. लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे कई खेत जलमग्न हो गए हैं और धान की रोपाई प्रभावित हो रही है.



किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना का लाभ मिलने के बजाय उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. खेतों में मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे ढेर और जलभराव के कारण जुताई का कार्य भी बाधित हो गया है.
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में लघु सिंचाई विभाग की इस योजना का शिलान्यास स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने किया था. योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन तालाब से निकाली गई मिट्टी खेतों में छोड़ दिए जाने से जल निकासी का रास्ता बंद हो गया.
स्थानीय किसान केदार मंडल ने बताया कि खेत में मिट्टी का बड़ा ढेर होने के कारण अब तक जुताई नहीं हो सकी है. लगातार बारिश से खेतों में पानी जमा है, जिससे समय पर धान की रोपाई करना मुश्किल हो गया है. उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से खेतों से मिट्टी हटाने, जमीन समतल कराने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने की मांग की.
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो इस वर्ष धान की खेती गंभीर रूप से प्रभावित होगी और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल





