जामताड़ा/ Manish Baranwal जिले से एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जो सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. सड़क हादसों में लोगों की जान बचाने वाले “नेक मददगार” सम्मान तो पा रहे हैं, लेकिन जब बात इनाम की आती है तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है.

परिवहन विभाग द्वारा संचालित गुड समेरिटन योजना का उद्देश्य दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर मदद पहुंचाना है. मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 134ए के तहत इस पहल में मददगारों को सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन देने का प्रावधान है. लेकिन, जामताड़ा जिले में यह योजना सरकारी उदासीनता की वजह से अधूरी नजर आ रही है. विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनाम देने के लिए आवंटन नहीं होने से लाभुकों को राशि नहीं मिल पा रही है.
जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक तोसीफ जलीली के अनुसार वर्ष 2022 में योजना शुरू हुई थी और उस समय राशि भी मिली थी. इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित किया गया, लेकिन जानकारी के अभाव में खर्च नहीं हो सका और मार्च 2023 में राशि सरेंडर करनी पड़ी. इसके बाद से अब तक इस मद में कोई भुगतान नहीं हुआ है.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 6 से 10 आवेदन लंबित हैं, जिनका भुगतान होना बाकी है. वहीं बीते साल इस योजना के तहत 7 लोगों को पुरस्कृत किया जा चुका है. योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 5 हजार और झारखंड सरकार की ओर से 2 हजार रुपये देने का प्रावधान है.
इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ गुड समेरिटन को 1 लाख रुपये तक का पुरस्कार देने की व्यवस्था भी है. वहीं जनवरी से मार्च 2026 के बीच लाई गई राहवीर योजना के तहत 3 लाभुकों को राशि मिलनी है, लेकिन आवंटन के अभाव में भुगतान अब तक अटका हुआ है. हालांकि हिट एंड रन मुआवजा योजना के तहत कुछ राहत जरूर मिली है. वर्ष 2022 से मार्च 2026 तक करीब 55 लाभुकों में से 22 को मुआवजा राशि उनके खाते में भेजी जा चुकी है, जबकि अन्य मामलों की प्रक्रिया जारी है.
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जान बचाने वाले आगे आ रहे हैं, तो क्या सिस्टम भी उनके हौसले को मजबूत करने के लिए आगे आएगा, या फिर सम्मान के साथ ही उनका हक अधूरा रह जाएगा.

