जामताड़ा: जिले के नारायणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में रविवार को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से निर्माणाधीन भवन की छत की सेंटरिंग ढलाई के दौरान अचानक भरभराकर गिर गई. गनीमत रही कि घटना के समय कार्यस्थल पर मौजूद किसी मजदूर या कर्मचारी को चोट नहीं आई. हालांकि इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संवेदक की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.



जानकारी के अनुसार प्रखंड कार्यालय परिसर में पूर्व से निर्मित पानी टंकी के समीप पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का भवन बनाया जा रहा है. रविवार को छत की ढलाई का कार्य चल रहा था. बताया जा रहा है कि करीब 80 प्रतिशत ढलाई पूरी हो चुकी थी, तभी अचानक सेंटरिंग का बड़ा हिस्सा कमजोर पड़ गया और पूरी संरचना भरभराकर नीचे गिर गई. घटना के बाद निर्माण स्थल पर अफरा- तफरी मच गई और काम तत्काल रोक दिया गया.
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. लोगों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री और लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.
नारायणपुर पंचायत समिति सदस्य पवन पोद्दार ने कहा कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से नियमित पेयजल आपूर्ति की मांग कर रहे हैं. ऐसे महत्वपूर्ण सरकारी निर्माण कार्य में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है. यदि निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो पूरी योजना प्रभावित हो सकती है. उन्होंने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच कर दोषी संवेदक और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की.
वहीं पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता संतोष महतो ने बताया कि करीब 150×60 क्षेत्रफल में छत की ढलाई की जानी थी. कार्य दो दिनों में पूरा होना था, लेकिन ढलाई शुरू होते ही सेंटरिंग खुल गई और पूरी संरचना नीचे गिर गई. विभाग द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है तथा आगे की कार्रवाई की जाएगी.
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त सेंटरिंग, सहायक सामग्री और तकनीकी मानकों की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल





