
जमशेदपुर: टांटिया यूनिवर्सिटी, श्रीगंगानगर (राजस्थान) ने जमशेदपुर के योग विशेषज्ञ रवि शंकर नेवार को योग विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की है. उन्हें “महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग एवं भगवान बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग में व्यक्तित्व विकास के आयामों का अध्ययन” विषय पर किए गए शोध के लिए यह उपाधि मिली है.


नेवार का शोध मानव व्यवहार में सुधार, मानसिक विकारों से मुक्ति तथा स्वस्थ, सरल और संतुलित जीवनशैली के विकास पर केंद्रित है. शोध में महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग और भगवान बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए बताया गया है कि दोनों ही दर्शन शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर व्यक्तित्व के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने अपने शोध में यह भी उल्लेख किया है कि आधुनिक जीवन में बढ़ते तनाव, चिंता, अवसाद और व्यक्तित्व संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय आर्ष ग्रंथों में वर्णित सिद्धांत आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं. सैद्धांतिक भिन्नताओं के बावजूद दोनों विचारधाराओं का अंतिम उद्देश्य मानव व्यक्तित्व को पूर्णता की ओर ले जाना है.
इस उपलब्धि पर रवि शंकर नेवार ने अपने शोध निर्देशक डॉ. रामदेवा राम आलडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के बिना यह सफलता संभव नहीं थी.
रवि शंकर नेवार पिछले कई वर्षों से जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के योग विभाग में फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं. उनके प्रशिक्षित अनेक विद्यार्थी झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग में योग इंस्ट्रक्टर तथा विभिन्न विद्यालयों में योग शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं.
वर्तमान में वे स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के योग मास्टर ट्रेनर, इंडियन योग एसोसिएशन के लाइफ मेंबर, योगासन भारत के नेशनल जज, योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ झारखंड के पैरा योगासन स्टेट कोऑर्डिनेटर तथा पूर्वी सिंहभूम जिला योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं.
Edited By Sarita Mahato


