
सरायकेला: नगर पंचायत क्षेत्र में गहराता पेयजल संकट अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. भाजपा नेता और सरायकेला विधानसभा के विधायक प्रतिनिधि सनंद आचार्य ने नगर पंचायत अध्यक्ष और वर्तमान बोर्ड पर तीखा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनता की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि नगरवासी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं, लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदार लोग कुर्सी का सुख भोगने में व्यस्त हैं.


सनंद आचार्य ने कहा कि चुनाव के दौरान जनता से नियमित पेयजल आपूर्ति और बेहतर नागरिक सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए गए थे. लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी नगर की सबसे बड़ी समस्या जस की तस बनी हुई है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लगता है नगर पंचायत अध्यक्ष का हनीमून पीरियड अभी तक खत्म नहीं हुआ है. जनता प्यास से बेहाल है और जिम्मेदार मौन बैठे हैं.”
उन्होंने दावा किया कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने नगर पंचायत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उनके अनुसार वित्तीय वर्ष 2021- 22 में 238 चापाकलों की मरम्मत पर लगभग 1.53 लाख रुपये खर्च किए गए थे. जबकि वर्ष 2022- 23 और 2023- 24 में इसी मद में खर्च बढ़कर करीब 16 लाख रुपये पहुंच गया. वर्ष 2024- 25 में भी लगभग 7.72 लाख रुपये खर्च किए गए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब काम लगभग एक जैसा था तो खर्च कई गुणा कैसे बढ़ गया. आखिर इस पैसे का हिसाब कौन देगा.
सनंद आचार्य ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत कार्यालय भ्रष्टाचारियों के कब्जे में चला गया है और वर्तमान बोर्ड भी उनके प्रभाव में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने कई अन्य मामलों में भी RTI दायर की है और आने वाले दिनों में ऐसे कई दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे, जिससे नगर पंचायत के खर्च और कार्यों की सच्चाई जनता के सामने आएगी.
उन्होंने चेतावनी दी कि नगर पंचायत क्षेत्र के जो लोग नियमित रूप से जलकर का भुगतान कर रहे हैं, यदि उन्हें पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया तो आंदोलन और उग्र होगा. उन्होंने कहा कि जनता का सब्र टूट रहा है और अब सड़क से लेकर कार्यालय तक जवाब मांगा जाएगा.
इस मामले में नगर प्रबंधक सुमित सुमन ने कहा कि विस्तृत जानकारी कार्यपालक पदाधिकारी ही दे सकते हैं. हालांकि समाचार लिखे जाने तक कार्यपालक पदाधिकारी का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगरवासियों को नियमित पेयजल कब मिलेगा. RTI में सामने आए खर्चों की निष्पक्ष जांच कौन करेगा. और यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी. फिलहाल पेयजल संकट और RTI के खुलासों ने नगर पंचायत सरायकेला की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सनद आचार्य ने कहा कि इस मामले को लेकर प्रथम अपिलीय पदाधिकारी कोर्ट (एसडीसी) के यहां अपील की गई है. रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह


