गम्हरिया: सरायकेला जिले के गम्हरिया प्रखंड में पीडीएस व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. सरकारी अनाज की कालाबाजारी के आरोपों के बीच जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि पीडीएस डीलर प्रदीप ठाकुर द्वारा खाद्यान्न वितरण में अनियमितता सामने आने के बाद बुधवार को जांच के लिए पहुंची मार्केटिंग ऑफिसर पूनम कुमारी बिना पर्याप्त जांच के ही खानापूर्ति कर लौट गईं.

बताया जा रहा है कि एमओ ने न तो पीड़ित उपभोक्ताओं से पूछताछ की और न ही डीलर के स्टॉक का मिलान किया. उल्टा उन्होंने डीलर के करीबियों का बयान दर्ज कर जांच पूरी मान ली. मीडिया के सवालों का जवाब न देना भी जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रहा है.
दरअसल उपभोक्ता खाना मुखर्जी और असीम मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत फरवरी माह का राशन मिलने के बजाय उन्हें ई-पॉश स्लिप पर “बाकी” लिखकर थमा दिया गया. मीडिया में मामला सामने आने के बाद डीएसओ के निर्देश पर जांच शुरू हुई थी, लेकिन जांच प्रक्रिया ही अब सवालों के घेरे में है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की जांच से डीलरों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका मजबूत होती है. बताया जाता है कि प्रदीप ठाकुर पर पूर्व में भी कालाबाजारी के आरोप लग चुके हैं, लेकिन हर बार वे प्रभाव और पहुंच के कारण कार्रवाई से बचते रहे हैं. इस बार भी मामले के दबने की आशंका जताई जा रही है. पूरे प्रकरण ने प्रखंड में पीडीएस व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उपभोक्ताओं ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है

