
जामताड़ा : देशभर में साइबर अपराध की राजधानी के रूप में पहचान बना चुके जामताड़ा में पुलिस की सख्ती के बावजूद ऑनलाइन ठगी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. झारखंड पुलिस द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत कई बड़े साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी हुई है. बावजूद इसके जिले में साइबर ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं.


हाल ही में जामताड़ा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों के पास से नौ मोबाइल फोन और 22 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी फर्जी बैंक कस्टमर केयर नंबर, नकली कॉल सेंटर और क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे थे. ये गिरोह देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना रहा था.
जिले में पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह के नेतृत्व में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार छापेमारी, गिरफ्तारी और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. पुलिस की विशेष टीम साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध इलाकों और गांवों पर लगातार नजर रख रही है, जहां पहले भी ऐसे नेटवर्क सक्रिय पाए गए हैं.
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगातार पुलिस कार्रवाई के बावजूद साइबर अपराध की जड़ें इतनी मजबूत क्यों बनी हुई हैं. जानकारों का मानना है कि बेरोजगारी, तकनीक का दुरुपयोग और कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह युवाओं को इस अवैध कारोबार की ओर आकर्षित कर रही है.
जामताड़ा पुलिस का रुख स्पष्ट है कि साइबर अपराध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद साइबर ठगों की सक्रियता यह संकेत देती है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. समाज, परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासन को मिलकर युवाओं को सही दिशा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने होंगे. जब तक साइबर अपराध के सामाजिक और आर्थिक कारणों पर प्रभावी ढंग से काम नहीं किया जाएगा, तब तक इस चुनौती पर पूरी तरह नियंत्रण पाना कठिन बना रहेगा.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल


