सरायकेला/ Pramod Singh परिमार्जित सरायकेला छऊ शैली के जनक कुंवर विजय प्रताप सिंह की स्मृति में एक भावनात्मक और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. छऊ कला केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा का विधिवत अनावरण नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी द्वारा किया गया. प्रतिमा अनावरण के साथ ही पूरे परिसर में तालियों की गूंज सुनाई दी और उपस्थित लोगों ने महान विभूति को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर छऊ कला से जुड़े वरिष्ठ कलाकार, युवा प्रतिभाएं, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि कुंवर विजय प्रताप सिंह ने जिस दूरदृष्टि और समर्पण के साथ सरायकेला छऊ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वह आज भी प्रेरणास्रोत है. उन्होंने कहा कि इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. उन्होंने यह भी कहा कि नगर पंचायत छऊ कलाकारों के सम्मान, संरक्षण और उनके आर्थिक- सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. आने वाले समय में छऊ कला के प्रचार- प्रसार, प्रशिक्षण और आयोजन को लेकर विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं.
गौरतलब है कि कुंवर विजय प्रताप सिंह का जन्म वर्ष 1896 में हुआ था. वे सरायकेला राजपरिवार से जुड़े एक दूरदर्शी और कला प्रेमी संरक्षक थे. उन्होंने छऊ नृत्य को लोक परंपरा से आगे बढ़ाकर एक परिमार्जित और मंचीय स्वरूप प्रदान किया. उनके प्रयासों से सरायकेला छऊ शैली में भाव-भंगिमा, संगीत, ताल- लय और वेशभूषा में नई परिपक्वता आई.
उन्होंने कलाकारों को प्रशिक्षित करने, नृत्य को संरक्षित करने और इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्ष 1951 में उनके निधन के बाद भी उनकी विरासत आज तक जीवित है और नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है. कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए संकल्प लिया कि सरायकेला छऊ की इस समृद्ध परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पूरी गरिमा के साथ पहुंचाया जाएगा. इस अवसर पर नगर पंचायत उपाध्यक्ष अविनाश कवि, भोला मोहंती, कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

