चाईबासा/ Jayant Pramanik अखिल भारतीय बाघ आकलन- 2026 के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुंदरुगुटू वन प्रक्षेत्र में वन्यजीव सर्वे का कार्य तेज़ी से जारी है. जिले के चार वन प्रमंडलों सारंडा, पोड़ाहाट, कोल्हान और चाईबासा में 15 दिसंबर से यह विशेष गणना अभियान चलाया जा रहा है.

इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य बाघों की उपस्थिति और संख्या का आकलन करना है, हालांकि इसके साथ ही हाथी, तेंदुआ, हिरण, गिद्ध सहित अन्य वन्यजीवों से संबंधित आंकड़े भी एकत्र किए जा रहे हैं. वनकर्मी जंगल में पाए जाने वाले वन्यजीवों के पदचिन्ह और मल के फोटो लेकर एम-स्ट्रिप्स ऐप पर अपलोड कर रहे हैं. यह जानकारी नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के माध्यम से वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून भेजी जा रही है.
पोड़ाहाट वन प्रमंडल के अंतर्गत कुंदरुगुटू क्षेत्र में वनकर्मी तीन समूहों में बंटकर सर्वे कर रहे हैं. दुर्गम और घने जंगलों में सटीक जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और वनमित्रों का सहयोग लिया जा रहा है.
सर्वे के शुरुआती चरण में अब तक बाघ की मौजूदगी के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन जैव विविधता के सकारात्मक संकेत सामने आए हैं. बार्किंग डियर, जंगली सुअर, लोमड़ी और हिरण के पदचिन्ह और मल मिलने से क्षेत्र में वन्यजीवों की सक्रियता की पुष्टि हुई है.
कुंदरुगुटू के तेंदा क्षेत्र में वनरक्षी सोमनाथ मेलगंडी और उदय सिंह तामसोय ने स्थानीय ग्रामीणों प्रधान बोदरा, जितेंद्र सवैया सहित अन्य लोगों के साथ संयुक्त रूप से सर्वे किया, जहां हिरण, जंगली सुअर और मोर की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं.
बताया गया कि प्रतिदिन 250 से अधिक वनकर्मी सुबह 6 बजे से लगभग 5 किलोमीटर तक जंगल में पैदल ट्रैकिंग कर साक्ष्य जुटा रहे हैं. यह सर्वे अभियान 15 से 22 दिसंबर तक लगातार जारी रहेगा.

