चाईबासा: कभी देश के सबसे खतरनाक “रेड कॉरिडोर” के रूप में पहचाना जाने वाला सारंडा जंगल अब तेजी से बदलता नजर आ रहा है. सुरक्षाबलों के लगातार दबाव, बड़े ऑपरेशन और ताबड़तोड़ एंटी नक्सल अभियान के बाद एक करोड़ के इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा का नेटवर्क कमजोर पड़ता दिख रहा है. सूत्रों के अनुसार संगठन में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई है और बड़ी संख्या में नक्सली अब आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहे हैं.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सागेन अंगरिया, गुलशन मुंडा, प्रभात मुखिया, जयंती, बसुमती, दर्शन, सुलेमान, किशोर, मुकेश, करण टियू, मुनीराम, बिरसा, दामू पड़ेया, लादू तिरिया, बैजनाथ, सुनीता और बसंती समेत कई सक्रिय नक्सली सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में हैं. बताया जा रहा है कि मिसिर बेसरा के दस्ते से जुड़े 25 से अधिक नक्सली जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं.
जानकारी के अनुसार हालिया मुठभेड़ों और लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद संगठन की स्थिति कमजोर हो गई है. जंगल में बढ़ते दबाव और सुरक्षाबलों की घेराबंदी से घबराकर कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का रास्ता तलाश रहे हैं.
सूत्रों का दावा है कि झारखंड पुलिस मुख्यालय स्तर पर संभावित आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को लेकर तैयारी भी शुरू हो चुकी है. वहीं सुरक्षा एजेंसियों का यह भी मानना है कि लगातार बढ़ते दबाव के कारण मिसिर बेसरा ने भी सारंडा क्षेत्र छोड़ दिया है. हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है, लेकिन एजेंसियों को उम्मीद है कि टूटते नेटवर्क और कमजोर होती पकड़ के बीच वह भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकता है.
दरअसल पिछले कई महीनों से झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीमों ने सारंडा क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन, घेराबंदी और एंटी नक्सल अभियान चलाया है. सुरक्षाबलों की रणनीतिक कार्रवाई से नक्सली संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है.
एक समय नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाने वाला सारंडा अब उनके लिए संकट क्षेत्र बनता जा रहा है. संगठन के भीतर बिखराव शुरू हो चुका है और बड़ी संख्या में नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की तैयारी कर रहे हैं.



