
बोकारो: स्टील प्लांट (बीएसएल) के प्रस्तावित विस्तार से पहले विस्थापितों का आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है. झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया है कि जमीन अधिग्रहण के सात दशक बाद भी हजारों विस्थापित परिवारों को न तो पुनर्वास मिला और न ही रोजगार. संगठन ने अपनी मांगों को लेकर 10 जुलाई से बोकारो उपायुक्त आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन घेराव करने की घोषणा की है.


बोकारो के टूटेन गार्डन में आयोजित प्रेस वार्ता में मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष ललित नारायण ने कहा कि बीएसएल के लिए अधिग्रहित 34,188 एकड़ भूमि से प्रभावित 9,748 परिवारों में से अब तक केवल 5,342 परिवारों का ही पुनर्वास किया गया है, जबकि 4,406 परिवार आज भी पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
मोर्चा का दावा है कि विस्थापितों के हिस्से की 11,598 नौकरियां अब भी लंबित हैं. संगठन ने मांग की कि बीएसएल विस्तार परियोजना में मिलने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार में स्थानीय युवाओं और विस्थापित परिवारों को शत-प्रतिशत प्राथमिकता दी जाए.
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तरी क्षेत्र की लगभग 1,030 एकड़ भूमि का मुआवजा और पूर्व में हुए त्रिपक्षीय समझौते का अब तक पालन नहीं किया गया है. नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्लांट विस्तार का विरोध और तेज किया जाएगा.
फिलहाल इस पूरे मामले पर बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.मेटा डिस्क्रिप्शन:
बोकारो स्टील प्लांट विस्तार से पहले विस्थापितों का विरोध तेज हो गया है. झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे की मांग को लेकर 10 जुलाई से उपायुक्त आवास के अनिश्चितकालीन घेराव का ऐलान किया है.
रिपोर्ट: शुभम मिश्रा






