
आदित्यपुर: करीब 395.15 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति योजना वर्षों की देरी के कारण एक बार फिर चर्चा में है. तीन वर्षों में पूरी होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्य शुरू होने के लगभग आठ वर्ष बाद भी शहरवासियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका है. इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह समेत स्थानीय लोगों ने परियोजना की प्रगति, गुणवत्ता और जवाबदेही पर कई सवाल उठाए हैं.


शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुरेन्द्र ने बताया कि परियोजना के तहत सीतारामपुर में 30 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तथा सांपड़ा में 60 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट बनाया जाना है. योजना का कार्य 4 दिसंबर 2018 से शुरू हुआ था और इसे 3 दिसंबर 2021 तक पूरा कर आदित्यपुर नगर निगम को सौंपा जाना था. हालांकि निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी और इसे कई बार समय विस्तार दिया गया.
जानकारी के अनुसार, सीतारामपुर प्लांट का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, जबकि सांपड़ा फिल्टर प्लांट का कार्य अभी भी अधूरा है. एजेंसी जिंदल ने दावा किया है कि 15 जुलाई 2026 तक सीतारामपुर प्लांट से आदित्यपुर-2 क्षेत्र में जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं सांपड़ा प्लांट से आदित्यपुर-1 और गम्हरिया क्षेत्र में दिसंबर 2026 तक जलापूर्ति शुरू होने की संभावना जताई गई है.
पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि यदि 15 जुलाई तक आदित्यपुर-2 क्षेत्र में जलापूर्ति शुरू नहीं हुई तो स्थानीय लोगों के साथ चरणबद्ध जन आंदोलन शुरू किया जाएगा. उनका कहना है कि वर्षों से लोग स्वच्छ पेयजल का इंतजार कर रहे हैं और अब नई समय- सीमा के बजाय परिणाम चाहिए.
उन्होंने परियोजना की लागत, गुणवत्ता और देरी के कारणों पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि वर्षों में निर्माण सामग्री और मजदूरी की लागत बढ़ने के बावजूद परियोजना की वास्तविक लागत और अतिरिक्त व्यय की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. साथ ही उन्होंने परियोजना का थर्ड पार्टी तकनीकी ऑडिट कराने, लंबे समय से लगे उपकरणों की गुणवत्ता जांच कराने और जलापूर्ति शुरू होने से पहले संपूर्ण प्रणाली का सफल ट्रायल सार्वजनिक करने की मांग की.
उन्होंने यह भी कहा कि नई योजना पूरी नहीं होने के कारण पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. यदि परियोजना समय पर पूरी हो जाती तो सरकारी धन की भी बचत होती और लोगों को वर्षों पहले ही नियमित पेयजल सुविधा मिल जाती.
इस संबंध में परियोजना से जुड़े विभाग और कार्यदायी एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे केवल नई तिथियां नहीं, बल्कि घर-घर तक नियमित जलापूर्ति शुरू होते देखना चाहते हैं. वैसे पुरेन्द्र ने साफ कर दिया है कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर आदित्यपुर- गम्हरिया विकास समिति का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही नगर आयुक्त से मुलाक़ात करेगा और स्वागत के साथ समस्याओं से अवगत करायेगा.
इस अवसर पर उदित यादव, ओमप्रकाश, देवप्रकाश देवता, अधिवक्ता संजय कुमार, सत्येंद्र प्रभात, संतोष यादव, प्रमोद गुप्ता, दिलीप मंडल, नील माधव घोष, राजेश यादव, प्रिंस कुमार राय, भुवनेश्वर यादव, संतोष कुमार सिंह और सोनू पासवान सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे.
Edited By Sarita






