सरायकेला: आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत समय कंस्ट्रक्शन का सनराइज प्वाइंट में जमीन विवाद के मामले में आज डीसी कोर्ट में उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह सुनवाई करेंगे. नियमों को ताक पर रखकर एलआरडीसी द्वारा आरके सिन्हा के डीड में छेड़छाड़ का जिक्र करते हुए आरके सिन्हा का जमाबंदी को रद्द किया गया है. हैरानी की बात ये है कि डीड को गलत ठहराना या जमाबंदी को रद्द करने का अधिकर डीसी को भी नहीं है, लेकिन क्षेत्र में जमीन का हेरफेर करने का मास्टरमाइंड बिल्डर अनूप रंजन और उसके गुर्गे अनिल जैन, केके सिन्हा समेत अन्य के आगे एलआरडीसी ने नियमों को ताक पर रखकर जमाबंदी को रद्द कर दिया. अब यह मामला डीसी कोर्ट में चल रहा है, बड़ा सवाल यह है कि डीसी कोर्ट में न्यायपूर्ण सुनवाई होगी या फिर पैरवी, पहुंच और पक्षपात हावी रहेगा.

सूत्र बताते है कि अनिल जैन, केके सिन्हा और अन्य बिल्डर अनूप रंजन के गुर्गे की तरह है, जो हर दिन कभी अंचल ऑफिस तो कभी रजिस्ट्रार तो कभी डीसी के यहां अधिकारियों को झांसे में लेने का प्रयत्न कर रहा है. हम तथ्यों के आधार पर बात करेंगे कि इस मामले में कैसे रविन्द्र सिन्हा सही है और उन्हें अधिकारी, जमीन माफिया और बिल्डर के गठजोड़ द्वारा घेरने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन रविन्द्र सिन्हा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि नियमों के विरुद्ध अगर फैसला आता है तो मामले को कोर्ट में घसीटेंगे.
हर कारवाई संदेह के घेरे में !
रविन्द्र सिन्हा को सब रजिस्ट्रार ऑफिस से मिला डीड के पन्ना तीन में पेन से संशोधन किया गया है. रजिस्ट्री करनेवाले अधिवक्ता के अनुसार गलती होने पर उन्होंने ही पेन से ठीक किया और अंतिम पेज में शुद्धि कैप्शन टाइप करवाया, उसके बाद रजिस्ट्री कराया गया. लेकिन सब रजिस्ट्रार कार्यालय का डीड में संशोधन और शुद्धि संबंधित उल्लेख नहीं है. इसी को अधिकारी आधार बनाकर आरके सिन्हा को गलत साबित करने में तुले हुए हैं.
मार्च में मांगा ऑफिस डीड की सर्टिफाइड कॉपी, सितंबर में मिला
एलआरडीसी द्वारा जमाबंदी रद्द करने के निर्णय के बाद आरके सिन्हा ने सब रजिस्ट्रार ऑफिस में सर्टिफाइड कॉपी लेने के लिए आवेदन दिया, लेकिन यहां के क्लर्क ऑफिस के मूल प्रति नहीं मिलने का हवाला देते हुए मामले को लटकाया गया. फिर मामले को रजिस्ट्रार के संज्ञान में लाने के बाद 18 सितंबर को कॉपी दी है, लेकिन उससे पहले शिकायतकर्ता रजिस्ट्री ऑफिस में मौजूद था. संदेह है कि रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराया गया डीड अनिल जैन और अन्य के पास स्थित डीड को ऑफिस कॉपी बनाकर दिया गया. इसमें बड़ा सवाल है कि क्या रजिस्ट्री ऑफिस में खेला हुआ है.
नगर निगम के प्रशासक फैला रहे है भ्रम
बता दें कि तत्कालीन एसडीओ पारुल सिंह द्वारा मामले की जांच करते हुए समय कंस्ट्रक्शन का पास नक्शा को गलत बताया गया था और नगर निगम को नक्शा की जांच के निर्देश दिए थे. लेकिन रवि प्रकाश का बिल्डर से मधुर संबंध ने ये होने नहीं दिया और उनके प्रशासक ही अधिकारियों को यह बताते चलते है कि रविन्द्र सिन्हा का डीड गलत है.
2006 में रविन्द्र सिन्हा एलआरडीसी कोर्ट से मिला था 55 डिसमिल जमीन
रैयत गुरुचरण मंडल से रविन्द्र कुमार सिन्हा ने 2 एकड़ 9 डिसमिल जमीन का रजिस्ट्री किया था. अंचल ने जांच के उपरांत रविन्द्र सिन्हा को 1.19 एकड़ जमीन म्यूटेशन किया. लेकिन अनिल जैन, केके सिन्हा और अन्य ने इसके खिलाफ एलआरडीसी कोर्ट में शिकायत किया. जांच में पाया गया कि रैयत का 55 डिसमिल जमीन शेष है. तत्कालीन एलआरडीसी ने रविन्द्र सिन्हा को 55 डिसमिल जमीन देने का निर्देश दिया.
18 साल बाद करेक्शन वाला डीड का निकला भूत
एलआएरडीसी कोर्ट में 2006 में मामले का समाधान के बाद सभी पक्ष खुशी- खुशी मान लिए. रविन्द्र सिन्हा को 55 डिसमिल जमीन का एलपीसी मिला. जब रैयत गुरुचरण मंडल का निधन हुआ और जमीन को समय कंस्ट्रक्शन को दिया गया तब जाकर यह ओवरराइटिंग डीड का भूत सामने आया. जबकि 2006- 2007 में तत्कालीन एलआरडीसी भी दोनों डीड की जांच करते हुए आदेश दिया था.
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2 दिन पूर्व जमशेदपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया जिसकी खूब चर्चा हो रही है. दरअसल उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनूप रंजन के साथ आरके सिन्हा की नजर आ रहे हैं. अनूप रंजन ने दावा किया है कि उनका आरके सिन्हा के साथ कोई विवाद नहीं चल रहा है. सोशल मीडिया ने भ्रम फैलाया है. अनूप रंजन को बताना चाहिए कि यदि विवाद नहीं है तो डीसी कोर्ट में किस मामले की सुनवाई चल रही है. उन्हें यह भी बताना चाहिए कि सच्चाई क्या है. आरके सिन्हा को अपने साथ मंच पर बैठा कर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने इस बात के प्रमाण दे दिए कि जिस जमीन को लेकर आरके सिन्हा के साथ उनका विवाद चल रहा है दरअसल वह जमीन आरके सिन्हा की ही है किसी अन्य की नहीं. कुल मिलाकर कहे तो अनूप रंजन ने खुद इसकी गवाही दुनिया को दे दी है. अनूप रंजन ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए ग्राहकों को खास छूट देने की भी घोषणा की है ग्राहक भी समझ रहे होंगे कि छोटी सी छूट कहीं उन्हें भारी न पड़ जाए.
फैसले के बाद खोलेंगे सबका चिट्ठा
हमारी नजर डीसी नीतीश कुमार सिंह के फैसले पर रहेगी उसके बाद इस पूरे मामले का कच्चा चिट्ठा दुनिया के सामने रखी जाएगी. हम तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर खबर प्रकाशित करते हैं. इसका भी खुलासा करेंगे कि इस खेल में कौन-कौन खिलाड़ी है जो ड्रेसिंग रूम से इशारे कर रहे हैं और मैदान में खिलाड़ी उसी अनुरूप गेंद को बाउंड्री के बाहर पहुंचा रहा है. यह भी संभव है कि इस प्रकरण में बड़े-बड़े अधिकारी नप सकते हैं.

