
आदित्यपुर: सरायकेला के आदित्यपुर में पत्रकार और उसके पुत्र पर हुए कथित जानलेवा हमले के चार दिन बीत चुके हैं. एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं दर्ज हैं, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अब भी नहीं हो सकी है. दूसरी ओर, जिन पर कार्रवाई होनी चाहिए, उनके समर्थकों के थाना परिसर में पहुंचकर नारेबाजी करने का दृश्य कई सवाल खड़े कर रहा है.


गुरुवार शाम से प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला- खरसावां के बैनर तले पत्रकार आदित्यपुर थाना परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. लेकिन सबसे चौंकाने वाली तस्वीर यह रही कि धरना स्थल के आसपास आरोपी पक्ष के समर्थक भी खुलेआम जुटे और नारेबाजी करते रहे. सवाल यह है कि क्या यह सब पुलिस की जानकारी के बिना संभव था ?
जब गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है तो फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं ? आखिर पुलिस किसका इंतजार कर रही है ? कानून अपना काम करेगा या पहले राजनीतिक समीकरण तय होंगे ? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आम जनता भी जानना चाहती है.
पत्रकारों का आरोप है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है. उनका दावा है कि राजद जिलाध्यक्ष बैजू यादव, राजद नेता सिद्धनाथ सिंह यादव और संजय सिंह खुलकर आरोपी पक्ष के समर्थन में दिखाई दिए. इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला हो, पत्रकार धरने पर बैठे हों और आरोपी पक्ष बेखौफ होकर थाना परिसर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराए, तो स्वाभाविक रूप से पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे. आखिर यह संदेश किसे दिया जा रहा है- पीड़ित को या आरोपियों को ?
पत्रकारों का कहना है कि यदि एक पत्रकार को न्याय दिलाने में भी व्यवस्था इतनी धीमी पड़ जाए, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करेगा ? फिलहाल पत्रकार अपनी मांग पर अडिग हैं और साफ कह चुके हैं कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रहेगा.
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक और जिला पुलिस प्रशासन पर हैं. सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि कानून के राज और पुलिस की निष्पक्षता पर जनता के भरोसे का भी है.


