
आदित्यपुर: पत्रकार सुनील गुप्ता और उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता पर हुए जानलेवा हमले के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं. इस मामले को लेकर पत्रकारों और सामाजिक संगठनों में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है. वहीं पूरे घटनाक्रम में तत्कालीन थाना प्रभारी विनोद तिर्की और जांच अधिकारी रमण विश्वकर्मा की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है.


मंगलवार को प्रेस क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने आदित्यपुर थाना पहुंचकर नए थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह से मुलाकात की और आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की. प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पीड़ित पत्रकार को न्याय नहीं मिला तो प्रेस क्लब आंदोलन के लिए बाध्य होगा.
इस मामले का सबसे चर्चित पहलू काउंटर केस को लेकर सामने आया है. आरोप है कि पत्रकार सुनील गुप्ता द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपियों की शिकायत पर भी काउंटर केस दर्ज कर लिया. जबकि उस समय सुनील गुप्ता स्वयं गंभीर चोटों के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे थे. पत्रकारों का आरोप है कि गंभीर हमले के मामले में निष्पक्ष जांच के बजाय मामले को कमजोर करने और लीपापोती करने की कोशिश की गई.
इधर पुलिस द्वारा घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई है. सूत्रों के अनुसार फुटेज से पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिसके आधार पर आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है. नए थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई में जुटे हुए हैं.
उधर इस पूरे प्रकरण के बीच प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिला है. आदित्यपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी विनोद तिर्की को प्रभार से हटा दिया गया है. वहीं जांच अधिकारी रमण विश्वकर्मा एक अन्य मामले में कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित किए जा चुके हैं.
उल्लेखनीय है कि रविवार देर शाम पत्रकार सुनील गुप्ता और उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता पर कथित रूप से हमला किया गया था. इस मामले में प्रकाश कुमार यादव, दिनेश कुमार यादव, नीरज कुमार यादव समेत अन्य लोगों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है. घटना के पीछे वन विभाग की जमीन पर वर्षों से संचालित एक कथित अवैध खटाल को लेकर विवाद को मुख्य कारण बताया जा रहा है.
फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है. वहीं पत्रकार संगठनों की निगाह अब पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. यह मामला अब केवल एक पत्रकार पर हमले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जांच, निष्पक्षता और कानून व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.


