आदित्यपुर: नगर निगम गठन के करीब आठ साल बाद भी स्थायी कार्यालय का सपना अधूरा है. एक कार्यकाल पूरा होने के बाद अब दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन नगर निगम कार्यालय का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया है.

दूसरे कार्यकाल की पहली बोर्ड बैठक में वार्ड संख्या 30 के पार्षद सुधीर चौधरी ने जागृति मैदान में नगर निगम कार्यालय निर्माण का प्रस्ताव फिर से उठाया. उनके इस प्रस्ताव के बाद इलाके की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है.
गौरतलब है कि इससे पहले भी जागृति मैदान में निगम कार्यालय बनाने का प्रस्ताव सामने आया था, जिस पर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने जोरदार विरोध किया था. उस समय पुरेंद्र नारायण सिंह के नेतृत्व में आंदोलन चला था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और मंत्री बन्ना गुप्ता सहित कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने समर्थन दिया था. विरोध के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी. पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री द्वारा जागृति मैदान को स्टेडियम के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन वह अब तक सिर्फ कागजों और भाषणों तक ही सीमित रह गई है.
अब एक बार फिर जब इस मुद्दे को उठाया गया है, तो न केवल स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं, बल्कि पार्षदों के बीच भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. कुछ पार्षद नगर निगम कार्यालय को अपने- अपने क्षेत्र में स्थापित करने की मांग कर रहे हैं.
बताया जा रहा है कि नगर निगम कार्यालय के लिए करीब 30 करोड़ रुपये का फंड लंबे समय से लंबित पड़ा है और उपयोग नहीं हो पा रहा है. वहीं निगम द्वारा खरीदी गई कई मशीनें भी इस्तेमाल के अभाव में खराब होने लगी हैं. कुल मिलाकर नगर निगम कार्यालय को लेकर जारी खींचतान के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और योजना बार-बार अटक रही है. अब देखना यह होगा कि निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस बार इस योजना को जमीन पर उतारने में सफल होते हैं या फिर यह मुद्दा एक बार फिर विवादों में उलझकर रह जाता है. वैसे अंदरखाने की माने तो सारा खेल कमीशन का है. चुने हुए पार्षदों को बाहरी शक्ति यह कहकर भ्रमित कर रहे हैं कि जिस वार्ड में तीस करोड़ की लागत से निगम कार्यालय बनेगा वहां के पार्षद को इसका सीधा लाभ होगा. इस हवा को चुने हुए पार्षद बल दे रहे है. मजेदार बात यह है कि इस पूरे मामले में उसी जनता को नुकसान हो रहा है जिनके टैक्स के पैसों से निगम कार्यालय बनना है.

