आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिले के सबसे व्यस्ततम थाना क्षेत्रों में शामिल आदित्यपुर थाना तक पहुंचने वाली मुख्य सड़क आज बदहाल व्यवस्था की मिसाल बन चुकी है. हालात ऐसे हैं कि जिम्मेदार विभागों की चुप्पी ने आम लोगों की परेशानी को स्थायी संकट में बदल दिया है.

टाटा- कांड्रा मुख्य मार्ग से सतपथी होटल से लेकर रेलवे फाटक तक रोजाना सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक जाम की स्थिति बनी रहती है. यह कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं बल्कि 365 दिन का सच है, जिससे हर रोज हजारों लोग जूझने को मजबूर हैं.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी मार्ग पर शहरी स्वास्थ्य केंद्र, पेट्रोल पंप, थाना, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, बिजली विभाग और वन विभाग के कार्यालय स्थित हैं. ये सभी संस्थान सीधे तौर पर आपातकालीन सेवाओं से जुड़े हैं, इसके बावजूद यहां यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है. जाम का सबसे बड़ा कारण सड़क के दोनों ओर अवैध रूप से लगे फुटपाथी दुकानों का कब्जा है. हालात यह है कि सड़क संकरी हो चुकी है और वाहनों के लिए रास्ता लगभग बाधित रहता है.
आदित्यपुर नगर निगम का उड़नदस्ता हो या स्थानीय पुलिस, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है. कभी- कभार दिखावे के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान चलता है, लेकिन कुछ ही दिनों में दोगुनी रफ्तार से फिर कब्जा हो जाता है.
आलम यह है कि मरीज, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और अन्य विभागों के कर्मचारी सभी को इस जाम से जूझना पड़ता है, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता है.
सवाल यह उठता है कि जब थाना, अस्पताल और अन्य जरूरी कार्यालय इसी मार्ग पर हैं, तो आखिर प्रशासन की प्राथमिकता क्या है. क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है.
अगर समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो किसी भी आपात स्थिति में भारी नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता. अब जरूरत है कि पुलिस, प्रशासन और नगर निगम मिलकर ठोस और स्थायी कार्रवाई करें, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके.

