सरायकेला: धन, वैभव, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी की आराधना को लेकर सरायकेला में भक्तिमय माहौल बन गया है. खरकई नदी के पवित्र जल से कलश भरकर महिलाओं ने धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ गैरेज चौक स्थित लक्ष्मी मंदिर पहुंचकर कलश स्थापना की. इसके साथ ही मंदिर में मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो गई. पूजा के दौरान पूरा वातावरण मां लक्ष्मी के जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने मां से अपने परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की.


खरकई नदी से जल लाने की परंपरा का हुआ निर्वहन
खरकई नदी से देर शाम पवित्र जल लाने की धार्मिक परंपरा ने पूजा के माहौल को और भी विशेष बना दिया. महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक जल यात्रा में भाग लिया और कलश में जल भरकर मंदिर पहुंचीं. इसके बाद विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर पूजा की शुरुआत की गई. हिंदू धार्मिक मान्यताओं में कलश को मंगल, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कलश स्थापना के माध्यम से देवी-देवताओं का आह्वान कर परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना की जाती है.
सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी की आराधना
मां लक्ष्मी की पूजा केवल धन-धान्य की प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे परिवार की खुशहाली, व्यापार में उन्नति, अन्न की समृद्धि और सुखमय जीवन की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी स्वच्छता, सदाचार, परिश्रम और सकारात्मकता से प्रसन्न होती हैं. यही कारण है कि लक्ष्मी पूजा के अवसर पर श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ माता की आराधना करते हैं.
सामूहिक आस्था का प्रतीक बनी पूजा
सरायकेला के गैरेज चौक स्थित लक्ष्मी मंदिर में कलश स्थापना के साथ शुरू हुई पूजा स्थानीय धार्मिक परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतीक बन गई है. खरकई नदी से पवित्र जल लाकर मां के चरणों में अर्पित करने की परंपरा श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाती है. पूजा शुरू होने के साथ ही श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल है. भक्तों को विश्वास है कि मां लक्ष्मी की कृपा से उनके जीवन में सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि का वास होगा.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह (संपादक)

