जामताड़ा: किसानों की आर्थिक मजबूती और कृषि योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पैक्स व्यवस्था जामताड़ा जिले में अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही है. जिले के छह प्रखंडों में संचालित 119 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) की निगरानी की जिम्मेदारी महज दो प्रखंड सहकारिता अधिकारियों (बीसीओ) के कंधों पर है. ऐसे में समितियों की नियमित निगरानी, धान अधिप्राप्ति, खाद-बीज वितरण और किसानों से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं.


छह अधिकारियों की जरूरत, तैनात सिर्फ दो
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में 118 ग्रामीण और एक शहरी पैक्स सहित कुल 119 समितियां पंजीकृत हैं. निर्धारित मानक के अनुसार प्रत्येक 20 पैक्स पर एक बीसीओ की आवश्यकता बताई गई है. इस हिसाब से जामताड़ा में कम से कम छह बीसीओ होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में महज दो अधिकारी कार्यरत हैं. यानी आवश्यकता के मुकाबले चार अधिकारियों की कमी है. कार्यरत दोनों बीसीओ को कई प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार देकर विभागीय कामकाज संचालित किया जा रहा है. औसतन एक अधिकारी के जिम्मे करीब 60 पैक्स की निगरानी का बोझ है, जो निर्धारित मानक से लगभग तीन गुना है.
धान अधिप्राप्ति से लेकर खाद-बीज वितरण तक निगरानी प्रभावित होने की आशंका
बीसीओ के जिम्मे पैक्स समितियों की कार्यप्रणाली की निगरानी, खाद-बीज वितरण की समीक्षा, सहकारी समितियों का पुनर्गठन, धान अधिप्राप्ति व्यवस्था की देखरेख, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और विभागीय रिपोर्ट तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं.
अधिकारियों की कमी के कारण इन जिम्मेदारियों का समय पर निर्वहन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है. विशेष रूप से धान अधिप्राप्ति के दौरान किसानों की समस्याओं का समाधान, समितियों की गतिविधियों की जांच और निर्धारित प्रक्रियाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी जरूरी है.
किसानों को कैसे मिलेगा योजनाओं का पूरा लाभ ?
पैक्स ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और कृषि संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने में इनकी भूमिका अहम होती है. ऐसे में निगरानी करने वाले अधिकारियों की कमी से व्यवस्था की प्रभावशीलता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है. सवाल उठ रहा है कि जब 20 पैक्स पर एक अधिकारी की आवश्यकता बताई गई है, तो जामताड़ा में 119 समितियों की निगरानी केवल दो अधिकारियों के भरोसे कैसे प्रभावी ढंग से हो सकेगी ? अब देखना होगा कि सहकारिता विभाग अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए कब तक ठोस पहल करता है. पर्याप्त संख्या में बीसीओ की तैनाती से समितियों की निगरानी मजबूत होने के साथ किसानों से जुड़े कार्यों के समयबद्ध निष्पादन में भी सुधार की उम्मीद है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

