आदित्यपुर: नगर निगम की राजनीति में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है. वार्ड संख्या-1 के पार्षद वनमाली दास ने नगर निगम के मेयर संजय सरदार के रिश्तेदार गणेश सरदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आदित्यपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई है. पार्षद का आरोप है कि गणेश सरदार कथित रूप से खुद को वार्ड पार्षद बताकर उनके नाम और पद का गलत इस्तेमाल कर सरकारी कार्य में हस्तक्षेप कर रहा है तथा क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर रहा है.


पार्षद वनमाली दास के अनुसार शुक्रवार को बोनडी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर एक कंपनी द्वारा हाई-मास्ट लाइट लगाने का काम कराया जा रहा था. कार्यस्थल पर वन विभाग के गार्ड ने कर्मियों को रोककर कार्य के संबंध में जानकारी मांगी. कर्मियों ने कथित रूप से बताया कि यह काम आदित्यपुर नगर निगम के मेयर के निर्देश और वार्ड पार्षद की अनुशंसा पर कराया जा रहा है.
पार्षद का कहना है कि उन्हें इस कार्य की कोई जानकारी नहीं थी. मौके पर पहुंचने के बाद जब उन्होंने संबंधित कर्मियों से वार्ड पार्षद के बारे में पूछा तो उन्होंने मोबाइल में एक व्यक्ति की तस्वीर दिखाते हुए उसे वार्ड पार्षद बताया. पार्षद के मुताबिक, तस्वीर उनकी नहीं थी. शिकायत में वनमाली दास ने आरोप लगाया है कि उक्त व्यक्ति गणेश सरदार है, जो खुद को वार्ड पार्षद बताकर उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा था. शिकायत के अनुसार, गणेश सरदार को मेयर संजय सरदार का रिश्तेदार बताया गया है.
घर पर 20-30 लोगों के साथ पहुंचने का आरोप
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब पार्षद ने गणेश सरदार से इस संबंध में बात की. वनमाली दास का आरोप है कि इसके बाद गणेश सरदार करीब 20-30 लोगों के साथ उनके घर पहुंचा और वहां हंगामा करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी. पार्षद ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति उनके निर्वाचित पद और पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी या सार्वजनिक कार्य करवा रहा है, तो इसकी जांच आवश्यक है. उन्होंने संबंधित कंपनी और ठेकेदार से भी यह पता लगाने की मांग की है कि आखिर किसके आदेश पर वन क्षेत्र में हाई-मास्ट लाइट लगाने का कार्य कराया जा रहा था.
मेयर बोले- गणेश भाजपा कार्यकर्ता, आरोप बेबुनियाद
पूरे मामले में आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार ने गणेश सरदार का बचाव करते हुए आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है. मेयर ने कहा कि गणेश सरदार भाजपा का कार्यकर्ता है और उनका दूर का रिश्तेदार भी है. उन्होंने उस पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया. मेयर के इस बयान के बाद मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नगर निगम की राजनीतिक कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
सवाल यह कि आखिर ‘पार्षद’ बनकर कौन दे रहा था आदेश
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वनमाली दास के आरोप गलत हैं, तो कार्यस्थल पर मौजूद कर्मियों ने किस व्यक्ति को वार्ड पार्षद बताकर उसके निर्देश पर काम किए जाने की बात कही ? मोबाइल में दिखाई गई तस्वीर किसकी थी ? वन विभाग की जमीन पर हाई-मास्ट लाइट लगाने की अनुमति किस स्तर से मिली ? संबंधित कंपनी या ठेकेदार को काम का आदेश किसने दिया ? और यदि किसी व्यक्ति ने वास्तव में निर्वाचित पार्षद की पहचान का इस्तेमाल किया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा ? इसके अलावा पार्षद के घर पर 20- 30 लोगों के पहुंचने और धमकी देने के आरोप भी गंभीर हैं. इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.
भाजपा के लिए भी सवाल
गणेश सरदार के भाजपा कार्यकर्ता होने की बात खुद मेयर द्वारा कही गई है. ऐसे में भाजपा के स्थानीय संगठन के सामने भी यह सवाल खड़ा होता है कि उसके किसी कार्यकर्ता पर निर्वाचित पार्षद की पहचान का कथित दुरुपयोग करने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगते हैं तो संगठन इस मामले में क्या रुख अपनाता है. फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के बीच गेंद पुलिस के पाले में है. शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में किसने किसके नाम और पद का इस्तेमाल किया, हाई-मास्ट लाइट लगाने का आदेश किसने दिया और पार्षद के घर पर कथित रूप से हुए हंगामे और धमकी की घटना की वास्तविकता क्या है.

