जामताड़ा: सदर अस्पताल की स्थापना के लिए भूमि दान करने वाले पूर्व राजा स्वर्गीय जंगबहादुर सिंह की प्रतिमा अस्पताल परिसर के समीप स्थापित करने की मांग उठी है. राजा जंगबहादुर सिंह के वंशज नित्यगोपाल सिंह, नन्दगोपाल सिंह और अजय प्रसाद सिंह ने उपायुक्त को आवेदन देकर इस दिशा में पहल करने की मांग की है.


वंशजों ने अपने आवेदन में दावा किया है कि चंचला मंदिर के समीप स्थित सदर अस्पताल के निर्माण के लिए उनके पूर्वजों द्वारा भूमि दान की गई थी. आवेदन में खतियान संख्या 447 और खेसरा संख्या 2887 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अस्पताल जिस भूमि पर निर्मित है, उससे संबंधित मूल अभिलेख वर्तमान में उपलब्ध नहीं है.
अपने दावे के समर्थन में वंशजों ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक 337, दिनांक 30 अप्रैल 2014 का हवाला दिया है. उनके अनुसार, उक्त पत्र में जामताड़ा अनुमंडल अस्पताल के भूमि दाता के रूप में जमींदार स्वर्गीय राजा जंगबहादुर सिंह का नाम दर्ज होने का उल्लेख है.
जेबीसी स्कूल के लिए भी जमीन दान करने का दावा
वंशजों ने बताया कि राजा जंगबहादुर सिंह के परिवार और पूर्वजों ने जामताड़ा के जेबीसी स्कूल के लिए भी भूमि दान की थी. दान की गई भूमि पर विद्यालय भवन, छात्रावास सहित अन्य निर्माण किए गए थे. बाद में इसी स्थान पर नए भवन का निर्माण भी हुआ.
योगदान के सम्मान में प्रतिमा लगाने की मांग
वंशजों का कहना है कि राजा जंगबहादुर सिंह ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़े संस्थानों के लिए भूमि उपलब्ध कराकर जामताड़ा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. ऐसे में सदर अस्पताल के मुख्य हिस्से के समीप उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करना उनके योगदान के प्रति सम्मान होगा. उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापित होने से आने वाली पीढ़ियों को भी जामताड़ा के इतिहास और क्षेत्र के विकास में राजा जंगबहादुर सिंह के योगदान की जानकारी मिल सकेगी.
अस्पताल की जमीन की जांच और चहारदीवारी की भी मांग
वंशजों ने अस्पताल की भूमि के उस हिस्से की भी जांच कराने की मांग की है, जिसे सड़क की ओर लिए जाने की बात कही गई है. उन्होंने अस्पताल की भूमि को पुनः अस्पताल समिति के उपयोग में देने तथा परिसर की चहारदीवारी का निर्माण कराने की मांग भी की है, ताकि अस्पताल परिसर को व्यवस्थित और सुरक्षित किया जा सके.
आवेदन के साथ स्वर्गीय राजा जंगबहादुर सिंह का छायाचित्र और संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं. अब जिला प्रशासन द्वारा संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर लोगों की नजर है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

