चाईबासा/ सरायकेला: झारखंड में कमजोर पड़ चुका नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है. हाल के दिनों में बड़े इनामी नक्सलियों की गिरफ्तारी के बाद अब संगठन से जुड़े नक्सली भी मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को कोल्हान पुलिस मुख्यालय में चार हार्डकोर नक्सलियों ने झारखंड सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष हथियार डाल दिए. आत्मसमर्पण करने वालों में दस लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर, एक लाख रुपये का इनामी कोदोमुनी कोड़ा, अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम और पिंकी शामिल हैं. आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने हथियार भी पुलिस को सौंपे.



इस मौके पर कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा, सीआरपीएफ चाईबासा के डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम एसपी अमित रेणु, सरायकेला- खरसावां एसपी मनोज स्वर्गियारी समेत चाईबासा और सरायकेला- खरसावां जिले के पुलिस पदाधिकारी तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहे.

आत्मसमर्पण के दौरान चारों के पास से एके-47 राइफल. इंसास राइफल. वायरलेस सेट. मैगजीन और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं.
सलुका कायम के पास से एके-47 और 843 कारतूस बरामद
पुलिस के अनुसार 10 लाख रुपये का इनामी सलुका कायम भाकपा माओवादी संगठन के जोनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय था. उसके खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम जिले में 90 तथा सरायकेला-खरसावां जिले में छह मामले दर्ज हैं. यानी उसके खिलाफ कुल 96 मामले दर्ज हैं. आत्मसमर्पण के समय सलुका के पास से एक एके-47 राइफल. दो मैगजीन. 843 कारतूस. राउंड्स एवं अन्य सामग्री बरामद की गई. एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा के खिलाफ चाईबासा जिले में सात मामले दर्ज हैं. उसके पास से एक वायरलेस सेट और 697 कारतूस बरामद हुए. पिंकी पूर्ति के खिलाफ चाईबासा में 13 मामले दर्ज हैं. उसके पास से एक वायरलेस सेट और 639 कारतूस बरामद किए गए. वहीं सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाली अनिता तामसोय के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम में 12 तथा सरायकेला-खरसावां में एक मामला दर्ज है. उसके पास से एक इंसास राइफल. पांच मैगजीन. 97 कारतूस एवं अन्य सामग्री बरामद की गई.

चारों के खिलाफ कुल 129 मामले
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार चारों आत्मसमर्पित नक्सलियों के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले में कुल 129 मामले दर्ज हैं. सलुका कायम के खिलाफ 96. कोदोमुनी कोड़ा के खिलाफ सात. पिंकी पूर्ति के खिलाफ 13 तथा अनिता तामसोय के खिलाफ 13 मामले दर्ज हैं. सुरक्षा बलों के लिए इसे इसलिए भी महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है क्योंकि आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन का 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य भी शामिल है.

कोल्हान डीआईजी ने बताया ऐतिहासिक दिन
इस मौके पर कोल्हान के पुलिस उपमहानिरीक्षक अनुरंजन किस्टोफा ने आत्मसमर्पण को कोल्हान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उन्होंने नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से पुलिस. केंद्रीय सुरक्षा बल और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चला रही हैं. लगातार अभियान के परिणामस्वरूप संगठन कमजोर हुआ है और उसके कई बड़े कमांडर गिरफ्तार किए जा चुके हैं या मुठभेड़ में मारे गए हैं. डीआईजी ने बचे हुए नक्सलियों से भी सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की. उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में सम्मानजनक जीवन शुरू करने का यह बेहतर अवसर है. हालांकि उन्होंने सुरक्षा बलों के लिए आगे की चुनौतियों को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत बताई. उन्होंने पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों और आम लोगों के साथ बेहतर संवाद कायम करने का निर्देश दिया. उनका कहना था कि नक्सलवाद की वापसी रोकने के लिए सुरक्षा अभियान के साथ जनता का विश्वास जीतना भी जरूरी है.

सीआरपीएफ डीआईजी ने शहीद जवानों को किया नमन
सीआरपीएफ डीआईजी ने भी आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उन्होंने कोल्हान में पिछले करीब तीन दशक से चले नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों और अधिकारियों को नमन किया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के कारण अब स्थिति काफी बदली है. उन्होंने कहा कि अब कोल्हान के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. सुरक्षा का वातावरण बनने के बाद सड़क. शिक्षा. स्वास्थ्य. रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने क्षेत्र के लोगों से भी विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की.

सरायकेला एसपी बोले. जिले में अब गिने-चुने नक्सली बचे
सरायकेला- खरसावां के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि नक्सल संगठन की गतिविधियां अब काफी सीमित रह गई हैं. उन्होंने बताया कि जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में अब करीब पांच से छह नक्सलियों के बचे होने की जानकारी है. एसपी ने बचे हुए नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वे आत्मसमर्पण कर पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हैं तो उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा. लेकिन यदि वे हिंसा का रास्ता जारी रखते हैं तो सुरक्षा बल उनके खिलाफ कार्रवाई करने को मजबूर होंगे.
असीम मंडल के दस्ते पर सुरक्षा बलों की नजर
कोल्हान डीआईजी ने बताया कि क्षेत्र में अब मुख्य चुनौती बचे हुए छोटे दस्तों से है. उन्होंने कहा कि असीम मंडल का दस्ता सुरक्षा बलों के निशाने पर है. उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है. उन्होंने असीम मंडल सहित बचे हुए माओवादी सदस्यों से भी अपील की कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें. उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने वालों को नया जीवन शुरू करने का अवसर दिया जा रहा है.

पिछले एक साल में आत्मसमर्पण और कार्रवाई से कमजोर हुआ संगठन
पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में चाईबासा पुलिस के समक्ष भाकपा माओवादी संगठन के 10 सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद 21 मई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत कुल 27 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था. इनके पास से 16 हथियार और 3082 गोलियां बरामद की गई थीं. 28 जुलाई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत 14 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था. इनके पास से 10 हथियार और 1412 गोलियां बरामद हुई थीं. अब 11 अगस्त को ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत चार सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने सुरक्षा बलों के अभियान को और बड़ी सफलता दी है. पुलिस के अनुसार वर्ष 2025-26 में जुलाई तक पश्चिमी सिंहभूम जिले में 49 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया. वहीं पुलिस-मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए और 60 नक्सलियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
तीन दशक के नक्सलवाद के बाद विकास की नई उम्मीद
कोल्हान क्षेत्र करीब तीन दशक तक नक्सलवाद की हिंसा का सामना करता रहा है. सारंडा. पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगल लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे. इस दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कई जवानों और अधिकारियों ने अपनी शहादत दी. अब लगातार गिरफ्तारियों. मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण के कारण नक्सली संगठन की पकड़ कमजोर हुई है. सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर होने के बाद क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल सुरक्षा अभियान से नक्सलवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है. ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद. विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन. रोजगार के अवसर और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी उतना ही जरूरी है.
मंगलवार का आत्मसमर्पण इसी बदलते कोल्हान की तस्वीर पेश करता है. एक तरफ कभी संगठन के प्रभावशाली सदस्यों में शामिल रहे नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा बल बचे हुए माओवादी दस्तों के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं. अधिकारियों का संदेश साफ है. हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए दरवाजा खुला है. लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा.





