सरायकेला: जिले में किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के प्रशासनिक दावों के बीच खाद की कालाबाज़ारी के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. एक ओर औचक निरीक्षण और सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों का आरोप है कि कई दुकानों पर अब भी सरकारी दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या निरीक्षण केवल कागज़ी कार्रवाई बनकर रह गया है.


उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर जिला कृषि पदाधिकारी रोशन नीलकमल ने खरसावां और कुचाई प्रखंड की विभिन्न उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान कृषि निरीक्षक मधुसूदन कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक पंजी, विक्रय अभिलेख, पीओएस मशीन से ऑनलाइन प्रविष्टि, मूल्य सूची और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की.
निरीक्षण के दौरान कुचाई की कुछ उर्वरक दुकानें बंद मिलीं. इस पर संबंधित दुकानदारों को बिना उचित कारण दुकान बंद नहीं रखने तथा नियमित रूप से किसानों को खाद उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया.
जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी विक्रेता सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी दर पर ही खाद बेचें. प्रत्येक बिक्री की ऑनलाइन प्रविष्टि पीओएस मशीन से करें. निर्धारित मूल्य से अधिक राशि न लें. स्टॉक एवं मूल्य सूची का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से करें तथा कृत्रिम अभाव पैदा न करें. उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों के उल्लंघन पर संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि किसानों का कहना है कि निरीक्षण के बावजूद कई दुकानों पर खुलेआम अधिक कीमत वसूली जा रही है. उनका आरोप है कि अब तक किसी बड़े कालाबाज़ारी करने वाले पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कालाबाज़ारी जारी है, तो निरीक्षण का वास्तविक असर कहां दिख रहा है? किसानों का कहना है कि केवल निर्देश जारी करने से नहीं, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होने से ही व्यवस्था में सुधार आएगा. अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.
प्रमोद सिंह (संपादक)

