चाईबासा: जिले के सोनुआ प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मौसीबाड़ी एवं पुराना जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को मां विपद तारिणी की पूजा-अर्चना पूरे श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई. परिवार की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और सभी प्रकार की विपत्तियों से रक्षा की कामना को लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर मां की आराधना की.



मंगलवार सुबह करीब 9 बजे से ही मंदिरों में श्रद्धालु महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी. महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मां विपद तारिणी की पूजा कर 13 प्रकार के फल, मिठाइयों एवं विभिन्न पकवानों का भोग अर्पित किया. पूरे दिन मंदिर परिसर भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और जयघोष से भक्तिमय बना रहा.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकटों और विपत्तियों से मुक्ति के लिए यह व्रत सबसे पहले मां लक्ष्मी ने रखा था. कहा जाता है कि उन्होंने अपने पति भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और ननद सुभद्रा की मंगल यात्रा एवं सुरक्षा के लिए निर्जला व्रत कर मां विपद तारिणी की आराधना की थी. जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब उनकी यात्रा निर्विघ्न और सुरक्षित रहे, इसी उद्देश्य से यह पूजा की गई थी. तभी से इस क्षेत्र में विपद तारिणी व्रत की परंपरा चली आ रही है.
पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया. मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था एवं उत्साह का माहौल देखने को मिला.
रिपोर्ट: जयंत प्रमाणिक





