
आदित्यपुर: करीब 48 घंटे तक चले तनाव, वार्ता और प्रशासनिक प्रयासों के बाद बुधवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच करणी सेना युवा मोर्चा के सरायकेला- खरसावां जिला अध्यक्ष हिमांशु सिंह का पार्थिव शरीर उनके आदित्यपुर स्थित शांतिनगर आवास लाया गया. शव पहुंचते ही पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया. परिजनों की चीख- पुकार और समर्थकों की आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे.


अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े. स्थानीय पार्षद नीतू शर्मा, सुजाता सिंह, भाजपा नेता शैलेन्द्र सिंह, रमेश हांसदा, अशोक सिंह, कांग्रेस नेता अजय सिंह, सतवीर सिंह ‘सोमू’, डब्बा सोरेन सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिमांशु सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और नम आंखों से अंतिम विदाई दी.
अंत्येष्टि की सभी धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद शांतिनगर से बिष्टुपुर पार्वती घाट तक विशाल शव यात्रा निकाली गई. इस दौरान “हिमांशु सिंह अमर रहे.”, “हत्यारों को फांसी दो.”, “हिमांशु हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं.”, “पुलिस- प्रशासन हाय-हाय.” और “जब तक सूरज- चांद रहेगा, हिमांशु तेरा नाम रहेगा.” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. शव यात्रा में हजारों की भीड़ शामिल हुई.
अंतिम यात्रा में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन, जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह, समाजसेवी शंभूनाथ सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग मौजूद रहे.
देर शाम बिष्टुपुर पार्वती घाट पर पूरे विधि- विधान के साथ हिमांशु सिंह का अंतिम संस्कार किया गया. पूरे घटनाक्रम के दौरान जमशेदपुर और सरायकेला- खरसावां जिला पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था संभालने में पूरी तरह मुस्तैद रहे. अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ.
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों को पुलिस वाहन से खींचकर उन पर जानलेवा हमला किया गया और पुलिस तमाशबीन बनी रही. उन्होंने इसे सरकार और पुलिस व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि इससे बड़ा जघन्य अपराध क्या हो सकता है. उन्होंने सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई को पर्याप्त नहीं बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा पीड़ित परिवार की सभी न्यायोचित मांगों पर अविलंब कार्रवाई की मांग की. साथ ही भाजपा द्वारा 3 जुलाई को बुलाए गए जमशेदपुर बंद को अपना समर्थन देने की घोषणा की.
गौरतलब है कि बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर हुए विवाद के दौरान हिमांशु सिंह और प्रत्युष सिंह पर धारदार हथियार से हमला किया गया था. गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान टाटा मेन हॉस्पिटल में मौत हो गई, जबकि प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता के अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है.
घटना के बाद पूरे कोल्हान में भारी आक्रोश फैल गया था. परिजनों ने सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा, सरकारी नौकरी और अन्य मांगों को लेकर लगभग 48 घंटे तक अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया था. इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिजनों से बातचीत की. सरकार ने पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक और सरायकेला- खरसावां के पुलिस अधीक्षक को पद से हटाने, दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, आश्रित को सरकारी नौकरी की अनुशंसा तथा आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और स्पीडी ट्रायल का लिखित आश्वासन दिया. इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए.
इस पूरे घटनाक्रम में जहां एक ओर जनता का आक्रोश खुलकर सामने आया, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने लगातार संवाद, संयम और संवेदनशीलता के साथ स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया. दो दिनों तक चले तनावपूर्ण माहौल के बावजूद बड़े स्तर पर किसी अप्रिय घटना को रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी, जिसे अंततः शांतिपूर्ण तरीके से संभाल लिया गया. अब पूरे कोल्हान की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन अपने लिखित आश्वासनों को कितनी तेजी से धरातल पर उतारते हैं और दोषियों को कब तक कानून के कठघरे में खड़ा किया जाता है.
Edited By Sarita






