
सरायकेला: जिला शिक्षा विभाग का एक आदेश इन दिनों पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. एनआर गवर्नमेंट प्लस टू स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अंबिका प्रधान को बिना कारण बताओ नोटिस, बिना विभागीय जांच और बिना सार्वजनिक स्पष्टीकरण के उनके पद से हटाकर विद्यालय की जिम्मेदारी शिक्षक वासुदेव राम को सौंप दी गई है. इस फैसले के बाद शिक्षा जगत, अभिभावकों और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं.


जानकारी के अनुसार, अंबिका प्रधान के कार्यकाल में विद्यालय के शैक्षणिक माहौल और परीक्षा परिणामों में सुधार की बात कही जा रही थी. ऐसे में अचानक हुए नेतृत्व परिवर्तन ने लोगों को हैरान कर दिया है. लोगों का सवाल है कि यदि उनके कार्य में कोई कमी थी तो विभाग ने नियमानुसार कारण बताओ नोटिस या विभागीय जांच की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई.
वहीं, जिन वासुदेव राम को विद्यालय का प्रभारी बनाया गया है, उनके नाम को लेकर पहले भी विभिन्न विवादों और शिकायतों की चर्चा होती रही है. स्थानीय स्तर पर उन पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए जाते रहे हैं. हालांकि इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है.
अब शिक्षा विभाग के इस निर्णय को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर नियुक्ति का आधार क्या था. क्या यह निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया या फिर किसी प्रभावशाली दबाव में आदेश जारी हुआ. लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि विभाग के पास ठोस कारण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए. यदि बिना स्पष्ट कारण किसी प्रभारी प्रधानाध्यापिका को हटाया जाता है और विवादों में चर्चा में रहे शिक्षक को जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
फिलहाल इस पूरे मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वह इस निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट करता है या फिर यह विवाद और गहराता है.
प्रमोद सिंह
संपादक






