
आदित्यपुर: पहली तेज बारिश ने ही बिजली विभाग की तैयारियों और मेंटेनेंस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी. मंगलवार को दिनभर की भीषण गर्मी और उमस के बाद हुई तेज बारिश और वज्रपात से आसंगी गांधी आईटीआई के समीप हाई टेंशन लाइन में तकनीकी खराबी आ गई. इसके बाद आदित्यपुर का बड़ा इलाका अंधेरे में डूब गया और हजारों उपभोक्ताओं को करीब सात घंटे तक बिजली संकट झेलना पड़ा.


तकनीकी खराबी के कारण कुलुपटांगा, सालडीह, जुगसलाई, कल्पनापुरी, कोका-कोला समेत लगभग सभी प्रमुख फीडरों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई. कई इलाकों में देर रात तक बिजली बहाल हो गई, लेकिन कुलुपटांगा फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं को रात 10 बजे तक भी बिजली नसीब नहीं हुई. उमस भरी गर्मी में लोग घरों में कैद होकर परेशान रहे, जबकि विभागीय अधिकारी केवल यही कहते रहे कि “काम चल रहा है”, “पेड़ गिर गया है”, “इंसुलेटर पंचर हो गया है”, “लाइन ट्रिप कर रही है”.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर वर्ष बरसात से पहले मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त कैसे हो जाती है. यदि समय पर लाइन, इंसुलेटर, ट्रांसफार्मर और पेड़ों की कटाई का कार्य हुआ होता, तो क्या हजारों उपभोक्ताओं को घंटों अंधेरे में रहना पड़ता. लोगों का आरोप है कि मेंटेनेंस का दावा कागजों तक सीमित रह जाता है, जबकि जमीनी हकीकत हर बारिश में सामने आ जाती है.
आदित्यपुर में बिजली व्यवस्था की स्थिति ऐसी हो गई है कि तेज आंधी या बारिश शुरू होते ही लोगों को इस बात की चिंता सताने लगती है कि अब बिजली कब आएगी. यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है, लेकिन विभाग स्थायी समाधान निकालने में अब तक विफल रहा है.
दूसरी ओर, आदित्यपुर में जेबीवीएनएल की अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना पिछले करीब दो वर्षों से अधूरी पड़ी है. करोड़ों रुपये की इस योजना के बावजूद उपभोक्ताओं को आज भी जर्जर ओवरहेड लाइन और बार- बार होने वाली तकनीकी खराबी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. वहीं जुस्को की बिजली सेवा भी अब तक पूरे क्षेत्र में नहीं पहुंच सकी है और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण अधिकांश उपभोक्ता उसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं.
बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि जब लगातार बिजली दरों में वृद्धि की जा रही है, तो सेवा की गुणवत्ता में सुधार क्यों नहीं दिख रहा. यदि पहली बारिश में ही पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है, तो पूरे मानसून के दौरान लोगों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर आदित्यपुर के लाखों बिजली उपभोक्ता कब तक विभाग की लापरवाही, अधूरी योजनाओं और कमजोर मेंटेनेंस व्यवस्था का दंश झेलते रहेंगे. क्या इस बार भी विभाग केवल तकनीकी खराबी का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाएगा, या फिर जवाबदेही तय कर बिजली व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.
Edited By Sarita






