
आदित्यपुर: पत्रकार सुनील कुमार गुप्ता और उनके पुत्र पर हुए हमले के मामले में दर्ज एफआईआर में गंभीर धाराएं लगाए जाने के बावजूद चार दिन बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं और पत्रकारों समेत आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.


उल्लेखनीय है कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(B), 115(2), 119(2), 109, 3(5), 352 एवं 351(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है, तो आखिर आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है. क्या पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, या फिर किसी प्रकार का दबाव कार्रवाई में बाधा बन रहा है. इन सवालों का जवाब अभी तक पुलिस की ओर से सार्वजनिक रूप से नहीं दिया गया है.
घटना के विरोध में प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला- खरसावां के बैनर तले पत्रकार आदित्यपुर थाना परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. पत्रकारों का कहना है कि यदि एक पत्रकार और उसके परिवार पर हमले के बाद भी आरोपी खुलेआम घूमते रहें, तो कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है.
पत्रकारों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे है. उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
अब सबकी निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. चार दिन बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होना न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि पूरे पत्रकार समाज और आम नागरिकों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.


