सरायकेला: कांड्रा थाना क्षेत्र की एक विवादित जमीन पर न्यायालय और प्रशासनिक आदेशों की कथित अनदेखी का मामला सामने आया है. आरोप है कि जिस जमीन पर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-145 के तहत यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था और बाद में झारखंड हाई कोर्ट ने भी उसी आदेश को बरकरार रखते हुए किसी भी प्रकार का निर्माण या गतिविधि नहीं करने का निर्देश दिया, उसी जमीन पर अब भी कार्य कराया जा रहा है. थाना में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित पक्ष शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक से मिला. इसके बाद एसपी ने कांड्रा थाना प्रभारी को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.



मामला कांड्रा थाना अंतर्गत मौजा गोपीनाथपुर के खाता संख्या-18 एवं 19 तथा प्लॉट संख्या-318, 321, 322, 323, 324 एवं 349 की कुल 1.98 एकड़ भूमि से जुड़ा है. इस भूमि पर स्वामित्व को लेकर घासीराम सरदार और गोविंद अग्रवाल के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है.
घासीराम सरदार के अनुसार, विवाद बढ़ने पर उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला के न्यायालय में आवेदन दिया था. मामले की सुनवाई के बाद एसडीओ ने धारा-145 के तहत विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण या अन्य गतिविधि पर रोक लगाते हुए दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.
बताया गया कि बाद में गोविंद अग्रवाल ने एसडीओ के आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी. हालांकि, हाई कोर्ट ने भी एसडीओ के आदेश को यथावत रखते हुए अंतिम निर्णय होने तक दोनों पक्षों को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करने का निर्देश दिया.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद विवादित जमीन पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है. इसकी लिखित शिकायत कांड्रा थाना में भी की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद शुक्रवार को घासीराम सरदार सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ पुलिस अधीक्षक से मिले. उन्होंने एसडीओ एवं हाई कोर्ट के आदेश सहित अन्य अभिलेख सौंपे. दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पुलिस अधीक्षक ने कांड्रा थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि यदि विवादित भूमि पर किसी प्रकार का कार्य चल रहा है तो उसे तत्काल बंद कराया जाए तथा न्यायालय एवं प्रशासन के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए.
फिलहाल भूमि स्वामित्व का मामला अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय में विचाराधीन है. अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष को वहां किसी प्रकार का निर्माण या गतिविधि करने की अनुमति नहीं है. अब इस मामले में पुलिस एवं प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.
प्रमोद सिंह (संपादक)





