सरायकेला: नगर पंचायत क्षेत्र में जिला खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा गुटखा, पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित अथवा संदिग्ध उत्पादों के खिलाफ चलाए जा रहे जांच अभियान को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं. छोटे दुकानदारों ने विभाग की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया है कि अभियान केवल फुटकर विक्रेताओं तक सीमित है, जबकि बड़े कारोबारी और थोक व्यापारी जांच के दायरे से बाहर बने हुए हैं.


दुकानदारों का कहना है कि शहर में कई बड़े व्यापारी और थोक विक्रेता सक्रिय हैं, जहां ट्रकों के माध्यम से बड़ी मात्रा में गुटखा और पान मसाला की आपूर्ति होती है तथा वहीं से पूरे क्षेत्र में सप्लाई की जाती है. इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम उन प्रतिष्ठानों तक नहीं पहुंचती, जबकि छोटी दुकानों पर लगातार छापेमारी और चालान की कार्रवाई की जा रही है.
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि यदि वास्तव में गुटखा और पान मसाला के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाना है तो सबसे पहले सप्लाई चैन के मूल स्रोतों पर कार्रवाई जरूरी है. उनका कहना है कि केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई कर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता, बल्कि यह केवल खानापूर्ति जैसा प्रतीत होता है.
दुकानदारों ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर बड़े गोदामों, थोक विक्रेताओं और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े प्रतिष्ठानों पर छापेमारी क्यों नहीं की जाती, जहां से पूरे जिले में माल की आपूर्ति होती है. उनका कहना है कि कार्रवाई में समानता न होने से पक्षपात की आशंका को बल मिलता है.
कई दुकानदारों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग की टीम अचानक छोटी दुकानों पर पहुंचकर जुर्माना वसूल लेती है और अपनी कार्रवाई पूरी मान लेती है, जबकि बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचने में कोई सख्ती नहीं दिखाई जाती. व्यापारियों ने कहा कि यदि कानून सभी के लिए समान है तो कार्रवाई भी समान रूप से होनी चाहिए.
व्यापारियों का यह भी कहना है कि मौजूदा कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है मानो आसान लक्ष्य चुनकर कार्रवाई की जा रही है. उनका कहना है कि यदि बड़े सप्लाई केंद्रों पर जांच की जाए तो अवैध और नियमविरुद्ध उत्पादों की आपूर्ति पर प्रभावी रोक लग सकती है.
स्थानीय व्यापारिक वर्ग में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई कर विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मान सकता. व्यापारियों ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग को थोक विक्रेताओं, गोदाम संचालकों और सप्लाई नेटवर्क की भी व्यापक जांच करनी चाहिए, ताकि अभियान की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके.
फिलहाल, विभागीय कार्रवाई और उस पर उठ रहे सवालों ने बाजार में नई बहस को जन्म दे दिया है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या आने वाले समय में बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी समान कार्रवाई की जाती है या नहीं.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह



