जमशेदपुर: 1 मई मजदूर दिवस जहां श्रमिकों के सम्मान का दिन माना जाता है, वहीं यह दिन एक परिवार और पूरे इलाके के लिए भावनात्मक स्मृति से जुड़ा हुआ है. इसी दिन “Mallick & Son’s” ट्रांसपोर्ट के संचालक स्वर्गीय फजल मल्लिक का इंतिकाल हुआ था, जिन्हें आज भी लोग नम आंखों से याद करते हैं.

फजल मल्लिक ने अपने पिता हयात मल्लिक के निधन के बाद परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली थी. उन्होंने मेहनत, ईमानदारी और समर्पण के बल पर “Mallick & Son’s” ट्रांसपोर्ट को एक पहचान दिलाई. उनकी सबसे बड़ी पहचान मजदूरों के प्रति उनका अपनापन था. वे अपने यहां काम करने वाले श्रमिकों को सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानते थे. हर साल मजदूर दिवस के मौके पर वे अपने मजदूरों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था करते थे और खुद उनके साथ बैठकर खाना खाते थे. यह परंपरा उनके व्यक्तित्व की सादगी और संवेदनशीलता को दर्शाती थी.
आज भी उनके साथ काम कर चुके लोग उन्हें याद करते हुए भावुक हो जाते हैं और उनकी दरियादिली की मिसाल देते हैं. मजदूरों के सम्मान और अधिकारों को लेकर उनकी सोच ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया.
सामाजिक जीवन में भी फजल मल्लिक की सक्रिय भूमिका रही. वे परसुडीह के मखदुमपुर बड़ी मस्जिद के सदर रह चुके थे, मखदुमपुर एक नंबर मोहर्रम अखाड़ा कमेटी से जुड़े थे, इसके अलावा बर्मामाइंस कब्रिस्तान कमेटी और परसुडीह थाना पीस कमेटी में भी उनकी अहम भागीदारी रही. मजदूर दिवस के अवसर पर परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे सिर्फ एक सफल व्यवसायी ही नहीं, बल्कि एक दयालु और संवेदनशील इंसान थे.
आज भले ही फजल मल्लिक हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मजदूरों के प्रति उनका प्यार, सम्मान और उनके द्वारा शुरू की गई परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं.

