जामताड़ा/ Manish Baranwal दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का असर गुरुवार को जामताड़ा में व्यापक रूप से देखने को मिला. हड़ताल के समर्थन में जिले के अधिकांश बैंक और कई सरकारी कार्यालय बंद रहे, जिससे बैंकिंग और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए.

ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष हड़ताल के समर्थन में सड़कों पर उतरे. साहिबगंज- गोविंदपुर मुख्य सड़क स्थित पसोई मोड़ पर प्रदर्शनकारियों ने घंटों तक जाम लगाया, जिससे यातायात प्रभावित रहा. हालांकि नेताओं ने मौके पर राहगीरों और वाहन चालकों को जाम के उद्देश्य की जानकारी देते हुए शांतिपूर्ण समर्थन की अपील की.
प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की गई. सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जनविरोधी नीतियों के कारण किसानों और मजदूरों की स्थिति कमजोर हो रही है. नेताओं ने भारत- अमेरिका समझौते को किसानों की आजीविका के लिए प्रतिकूल बताया.
चार लेबर कोड लागू कर बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने और मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने का भी आरोप लगाया गया. प्रदर्शनकारियों ने बिजली विधेयक और बीज विधेयक को आम जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की. उनका कहना था कि इन विधेयकों से किसानों, खेत मजदूरों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
सभा में मौजूद कई स्थानीय लोगों और राहगीरों ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि वे जनहित के मुद्दों पर संघर्ष में साथ हैं और अस्थायी असुविधा सहने को तैयार हैं.

