सरायकेला: सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार चौधरी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बर्खास्त करने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री स्टालिन और उनकी सरकार हिंदू धर्म के खिलाफ लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं और धार्मिक उन्माद फैलाने में संलिप्त हैं.

मनोज चौधरी ने अपने पत्र में कहा है कि हाल ही में त्रिची के अयानपुथुर गांव में श्रीराम प्रभु का पोस्टर जलाना अत्यंत निंदनीय और असहनीय कृत्य है. देशभर में जहां रावण दहन कर अधर्म के प्रतीक का अंत किया जा रहा है, वहीं श्रीराम का अपमान राष्ट्र के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कार्य है.
उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस की जानकारी में यह घटना होने के बावजूद तमिलनाडु सरकार के शह पर इसे अनुमति दी गई. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि धर्म के विरुद्ध घृणा फैलाने का प्रयास है. चौधरी ने कहा कि संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएँ तय की हैं, और उसके नाम पर धार्मिक नफरत फैलाना असंवैधानिक है.
मनोज चौधरी ने यह भी लिखा है कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदू धर्म के प्रति वैचारिक विद्वेष बढ़ा है. सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों से जोड़ने वाले बयान देने के बावजूद मुख्यमंत्री एमके. स्टालिन और उनके पुत्र उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध है.
अंत में उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि धार्मिक उन्माद फैलाने और हिंदू धर्म का अपमान करने वाले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए

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